गया जंक्शन पर रेलवे दुर्गा पूजा समिति का 104वां वर्ष, 1923 से बंगाली परंपरा के अनुसार हो रही मां दुर्गा की पूजा, 16 से 21 अक्टूबर तक होंगे धार्मिक अनुष्ठान

वर्ष 1923 से चली आ रही यह परंपरा 2026 में अपने 104वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। 16 अक्टूबर से चल रही है जो 21 अक्टूबर विजयादशमी तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे।

Oct 19, 2026 - 22:06
गया जंक्शन पर रेलवे दुर्गा पूजा समिति का 104वां वर्ष, 1923 से बंगाली परंपरा के अनुसार हो रही मां दुर्गा की पूजा, 16 से 21 अक्टूबर तक होंगे धार्मिक अनुष्ठान

गयाजी। गया जंक्शन स्थित चंद्रशेखर आजाद हॉल में पूर्व मध्य रेलवे की श्रीश्री दुर्गा पूजा समिति इस वर्ष भी बंगाली रीति-रिवाजों के अनुसार मां दुर्गा की पूजा-अर्चना किया गया । वर्ष 1923 से चली आ रही यह परंपरा 2026 में अपने 104वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। 16 अक्टूबर से चल रही है जो 21 अक्टूबर विजयादशमी तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। षष्ठी से विजयादशमी तक विशेष आयोजन आमंत्रण पत्र के अनुसार, 16 अक्टूबर को षष्ठी पर अधिवास, बेल वरण, आमंत्रण और बोधन होगा। 17 एवं 18 अक्टूबर को सप्तमी के अनुष्ठान, नवपत्रिका स्नान, प्राण प्रतिष्ठा, पुष्पांजलि और भोग निवेदन किया जाएगा। 19 अक्टूबर को महाष्टमी पर अष्टमी पूजा, थाली पूजा और संधि पूजा होगी। 20 अक्टूबर को महानवमी पर पूजा-अर्चना एवं हवन होगा। 21 अक्टूबर को विजयादशमी पर दशमी पूजा के बाद पारंपरिक सिंदूर खेला आयोजित किया जाएगा। प्रतिदिन शाम सात बजे आरती होगी। पं. उत्तम कुमार चक्रवर्ती करेंगे पूजा पूजा के प्रधान पुरोहित पंडित उत्तम कुमार चक्रवर्ती, सूर्यकुंड, गया हैं। समिति के चीफ पेट्रॉन स्टेशन मैनेजर विनोद कुमार सिंह, जनरल सेक्रेटरी आर.आर. सिन्हा हैं। संयुक्त सचिव मितलेश कुमार (SS2), राजीव कुमार (SS) और डी.के. यादव (PWI) हैं। कोषाध्यक्ष शंकर तिवारी तथा ऑडिटर अधिवक्ता विजय कुमार हैं। प्रसाद व्यवस्था से जुड़े सदस्यों में प्रमोद कुमार (TI), सुनील कुमार (मामू), श्रेया सिन्हा, आदित्य शांडिल्य, कुणाल कशव, अनिनेश पाठक, अरित शांडिल्य, रोहन तिवारी और आदित्य रंजन शामिल हैं। समिति के सलाहकार गोपाल प्रसाद (एस. वर्कर), सुरेश यादव, प्रमोद कुमार सिंह और अनूप यादव हैं। रेलवे दुर्गा पूजा समिति की यह ऐतिहासिक परंपरा गया जंक्शन पर धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और बंगाली संस्कृति की विरासत को निरंतर जीवंत बनाए हुए है।

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