ANEICON 2026: रांची में न्यूरोसाइंस के वैश्विक शोध और युवा वैज्ञानिकों की प्रतिभा पर मंथन
रांची: एसोसिएशन ऑफ न्यूरोसाइंटिस्ट्स ऑफ ईस्टर्न इंडिया (ANEI) के वार्षिक सम्मेलन ANEICON 2026 का दूसरा दिन शनिवार को रांची में वैज्ञानिक विमर्श, नवीन शोध और शैक्षणिक गतिविधियों के नाम रहा। झारखंड न्यूरोसाइंसेस सोसाइटी (JNS) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए 300 से अधिक प्रतिनिधियों और 100 विशेषज्ञ वक्ताओं ने हिस्सा लिया। दिनभर में 10 से अधिक वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें तंत्रिका विज्ञान की नवीनतम प्रगति, आधुनिक तकनीकों और नैदानिक अनुभवों पर चर्चा हुई।
रांची: एसोसिएशन ऑफ न्यूरोसाइंटिस्ट्स ऑफ ईस्टर्न इंडिया (ANEI) के वार्षिक सम्मेलन ANEICON 2026 का दूसरा दिन शनिवार को रांची में वैज्ञानिक विमर्श, नवीन शोध और शैक्षणिक गतिविधियों के नाम रहा। झारखंड न्यूरोसाइंसेस सोसाइटी (JNS) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए 300 से अधिक प्रतिनिधियों और 100 विशेषज्ञ वक्ताओं ने हिस्सा लिया। दिनभर में 10 से अधिक वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें तंत्रिका विज्ञान की नवीनतम प्रगति, आधुनिक तकनीकों और नैदानिक अनुभवों पर चर्चा हुई।
वैश्विक शोध और आधुनिक तकनीकों पर चर्चा
सम्मेलन के दूसरे दिन अमेरिका से आए डॉ. शंकर गोपीनाथ का विशेष व्याख्यान प्रमुख आकर्षण रहा। उन्होंने तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे नवीन शोध और तकनीकी प्रगति से संबंधित विषयों पर प्रकाश डाला। उनके व्याख्यान के माध्यम से प्रतिभागियों को न्यूरोसाइंस में विकसित हो रही आधुनिक वैज्ञानिक अवधारणाओं और तकनीकों को समझने का अवसर मिला।
विज्ञान के साथ दर्शन और मानवीय मूल्यों पर जोर
डॉ. एच. पी. नारायण के दार्शनिक व्याख्यान में मानव मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को समझने के व्यापक दृष्टिकोण पर विचार-विमर्श हुआ। इस सत्र में वैज्ञानिक ज्ञान के साथ नैतिकता, मानवीय संवेदनाओं और दर्शन के महत्व को रेखांकित किया गया।
युवा शोधकर्ताओं ने प्रस्तुत किए अपने शोध
सम्मेलन में युवा न्यूरोसाइंटिस्ट्स की शोध प्रस्तुतियों ने भी ध्यान आकर्षित किया। पोस्टर प्रेजेंटेशन के जरिए युवा शोधकर्ताओं ने अपने अकादमिक कार्यों, वैज्ञानिक निष्कर्षों और नए विचारों को सामने रखा। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से मस्तिष्क स्वास्थ्य और तंत्रिका संबंधी बीमारियों के उपचार में शोध की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
युवा प्रतिभागियों के वैज्ञानिक ज्ञान और त्वरित निर्णय क्षमता को परखने के लिए डॉ. संदीप चटर्जी क्विज का भी आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता ने सम्मेलन में शैक्षणिक गतिविधियों और प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा दिया।
‘हाउ आई डू इट’ सत्र में न्यूरोसर्जरी की तकनीकों का प्रदर्शन
‘How I Do It’ वीडियो सत्र में अनुभवी न्यूरोसर्जन्स ने विभिन्न न्यूरोसर्जिकल प्रक्रियाओं का चरणबद्ध प्रदर्शन किया। इस दौरान शल्य चिकित्सा की तकनीकों, व्यावहारिक चुनौतियों और उन्नत सर्जिकल विधियों से जुड़े अनुभव साझा किए गए। सत्र का उद्देश्य प्रतिभागियों को आधुनिक न्यूरोसर्जरी की बारीकियों से परिचित कराना और उनके नैदानिक कौशल को बेहतर बनाने में मदद करना रहा।
‘न्यूरल ब्रिजेज’ के जरिए सहयोग बढ़ाने पर जोर
सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. विराट हर्ष ने कहा कि ANEICON 2026 का उद्देश्य विभिन्न चिकित्सा विधाओं के साथ-साथ देशों, संस्कृतियों और विचारों के बीच भी ज्ञान एवं सहयोग के सेतु बनाना है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुभव, दार्शनिक विचारों और युवा शोधकर्ताओं की वैज्ञानिक प्रस्तुतियों का संगम न्यूरोसाइंस के भविष्य के लिए उत्साहजनक है।
दिन का समापन झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ। इस आयोजन के जरिए देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों को राज्य की कला और संस्कृति से परिचित होने का अवसर मिला। अब सम्मेलन के अंतिम दिन के वैज्ञानिक सत्रों पर प्रतिभागियों की नजरें टिकी हैं।
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