बिहार के विश्वविद्यालयों में शुरू होंगे 7 नए चार वर्षीय स्नातक कोर्स, डिग्री के साथ छात्रों को अप्रेंटिसशिप का मौका
पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के साथ रोजगारपरक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। राज्यपाल सह कुलाधिपति ने चार वर्षीय स्नातक शिक्षुता अंतर्निहित डिग्री कार्यक्रम के तहत 7 नए पाठ्यक्रम शुरू करने को मंजूरी दी है। यह व्यवस्था 30 सितंबर 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।
पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के साथ रोजगारपरक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। राज्यपाल सह कुलाधिपति ने चार वर्षीय स्नातक शिक्षुता अंतर्निहित डिग्री कार्यक्रम के तहत 7 नए पाठ्यक्रम शुरू करने को मंजूरी दी है। यह व्यवस्था 30 सितंबर 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को चार वर्षीय स्नातक डिग्री के साथ संबंधित क्षेत्र में अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही व्यावहारिक अनुभव हासिल करने और भविष्य में रोजगार के लिए तैयार होने में मदद मिलने की उम्मीद है।
स्वीकृत पाठ्यक्रमों में कला स्नातक के तहत विषय-वस्तु एवं रचनात्मक लेखन शामिल है। वहीं वाणिज्य संकाय में बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा, ई-कॉमर्स संचालन, मानव संसाधन संचालन और खुदरा संचालन से जुड़े चार पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
इसके अलावा विज्ञान स्नातक में स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन तथा बीएससी ऑनर्स में इलेक्ट्रॉनिक्स को मंजूरी दी गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स में डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स को मेजर, जबकि सोलर फोटोवोल्टिक सिस्टम या डेटा साइंस को माइनर के रूप में शामिल किया जाएगा।
हालांकि, इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश शुरू करने से पहले संबंधित विश्वविद्यालयों को निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए एकेडमिक काउंसिल के साथ सिंडिकेट और सीनेट से संशोधित अध्यादेश एवं विनियमों को मंजूरी लेना आवश्यक होगा।
संस्थानों को निर्धारित प्रावधानों के तहत त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी करना होगा। वहीं, 27 मई 2026 की पूर्व अधिसूचना के आधार पर पहले से दाखिला ले चुके विद्यार्थियों को भी संशोधित नियमों के तहत ही माना जाएगा। इससे उनके मौजूदा प्रवेश पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
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