मछली कारोबार में आएगा बड़ा बदलाव: मोबाइल मार्केटिंग और प्रोसेसिंग से बढ़ेगी कमाई, महिलाओं और युवाओं को मिलेंगे नए अवसर
नई दिल्ली। भारत का मत्स्य क्षेत्र अब केवल मछली उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है। सरकार का जोर अब मछली के प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, कोल्ड स्टोरेज और मोबाइल मार्केटिंग के जरिए इस कारोबार को अधिक लाभकारी बनाने पर है। इससे मछुआरों और मछली पालकों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली। भारत का मत्स्य क्षेत्र अब केवल मछली उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है। सरकार का जोर अब मछली के प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, कोल्ड स्टोरेज और मोबाइल मार्केटिंग के जरिए इस कारोबार को अधिक लाभकारी बनाने पर है। इससे मछुआरों और मछली पालकों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार के अनुसार, मत्स्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ब्लॉकचेन, ड्रोन तकनीक और स्मार्ट कोल्ड चेन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इन तकनीकों से मछली की गुणवत्ता बनाए रखने, आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने और उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल रही है।
उत्पादन से आगे बढ़ेगा मछली कारोबार
मत्स्य क्षेत्र में अब मछली को सीधे बाजार में बेचने के बजाय उसे प्रोसेस्ड, पैक्ड और ब्रांडेड उत्पाद के रूप में उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए मछली के अचार, पापड़, सूखी मछली, स्मोक्ड फिश और फिश पाउडर जैसे उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इससे मछुआरों और मछली पालकों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना है। साथ ही, मछली की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और बाजार तक पहुंचने से पहले खराब होने वाले उत्पादों की मात्रा कम करने में भी मदद मिलेगी।
मत्स्य क्षेत्र में 39,272 करोड़ रुपये का निवेश
केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 से अब तक मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के तहत कुल 39,272 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें ब्लू रिवोल्यूशन योजना, फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी योजनाएं शामिल हैं।
इन योजनाओं का उद्देश्य देशभर के 74.66 लाख मछुआरों और मछली पालकों के लिए उत्पादन, आधारभूत संरचना, रोजगार और आजीविका के अवसरों को मजबूत करना है।
परिवहन और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का विस्तार
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 3,393.85 करोड़ रुपये के निवेश से मछली परिवहन व्यवस्था, थोक और खुदरा बाजार, बिक्री केंद्र, फीड मिल, आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और वैल्यू एडेड एंटरप्राइज से जुड़ी कुल 46,500 सुविधाएं विकसित की गई हैं।
इसके अलावा पांच आधुनिक और स्मार्ट फिश मार्केट विकसित किए जा रहे हैं। इन बाजारों में आधुनिक आईटी सिस्टम, पर्यावरण अनुकूल तकनीक और बेहतर लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को शामिल किया जाएगा। इनसे करीब 15,900 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
बेहतर किस्म की मछलियों के उत्पादन पर जोर
उच्च गुणवत्ता वाले मछली उत्पादों की मांग को देखते हुए सरकार बेहतर नस्ल और तेजी से बढ़ने वाली मछलियों के विकास पर भी काम कर रही है। इसके तहत ऐसी किस्मों को विकसित करने की पहल की जा रही है, जिनमें रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक हो और उत्पादन बेहतर हो।
इस पहल में ट्राउट, झींगा, कतला, रोहू, तिलापिया, पंगासियस, सीबास और स्कैम्पी जैसी प्रजातियों की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर है। इससे घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी उच्च मूल्य वाले मछली उत्पादों की आपूर्ति मजबूत हो सकती है।
2,195 मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों को मिला समर्थन
छोटे मछुआरों और मछली पालकों को बाजार से जोड़ने के लिए सामूहिक उद्यम मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है। विभाग की ओर से अब तक 2,195 फिशरीज फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FFPOs) के गठन में सहयोग दिया गया है।
इन संगठनों के माध्यम से मछली पालक अपने उत्पादों को एक साथ बाजार तक पहुंचा सकते हैं और प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग तथा मार्केटिंग में सामूहिक रूप से भाग ले सकते हैं। इनमें से कई संगठनों को ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) से भी जोड़ा गया है, जिससे डिजिटल बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ सके।
इसके अलावा PM-MKSSY के तहत 5,500 मत्स्य सहकारी समितियों को FFPO के रूप में मजबूत किया जा रहा है।
महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते
मत्स्य क्षेत्र में वैल्यू एडिशन से महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पिछले पांच वर्षों में महिलाओं के लाभ के लिए 4,155 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 1,572 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं से 1.28 लाख से अधिक महिला लाभार्थियों को फायदा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
महिलाएं मछली सुखाने, मछली का अचार और पापड़ बनाने, स्मोक्ड फिश उत्पाद तैयार करने, फिश पाउडर बनाने, पैकेजिंग और खुदरा बिक्री जैसे कार्यों से जुड़ रही हैं। मोबाइल फिश वेंडिंग यूनिट और छोटे प्रोसेसिंग कारोबार भी महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर तैयार कर रहे हैं।
मोबाइल मार्केटिंग से उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी ताजी मछली
मोबाइल फिश मार्केटिंग यूनिट के जरिए मछली को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे बाजार तक पहुंचने में होने वाली देरी कम हो सकती है और मछली की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही, छोटे कारोबारियों और महिला उद्यमियों को स्थानीय स्तर पर बिक्री का अवसर मिलेगा।
क्या है सरकार की योजना?
केंद्र सरकार का लक्ष्य मत्स्य क्षेत्र को उत्पादन आधारित गतिविधि से आगे बढ़ाकर आधुनिक, तकनीक आधारित और बाजार-केंद्रित उद्योग के रूप में विकसित करना है। इसके लिए प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, डिजिटल मार्केटिंग, आधुनिक परिवहन और सामूहिक उद्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार की इन पहलों से मछुआरों और मछली पालकों की आय बढ़ाने, महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों की निर्यात क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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