पीएम मोदी ने किया ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ का उद्घाटन, भारतीय संस्कृति और युवाओं की भूमिका पर दिया जोर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान, युवा शक्ति और विकसित भारत के निर्माण में चिन्मय मिशन के योगदान को रेखांकित किया।

Oct 23, 2026 - 16:32
पीएम मोदी ने किया ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ का उद्घाटन, भारतीय संस्कृति और युवाओं की भूमिका पर दिया जोर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान, युवा शक्ति और विकसित भारत के निर्माण में चिन्मय मिशन के योगदान को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक ऐसी आध्यात्मिक चेतना है, जो दशकों से भारतीय ज्ञान और आध्यात्मिक परंपराओं को दुनिया तक पहुंचाने का काम कर रही है। उन्होंने मिशन के संस्थापक पूज्य स्वामी चिन्मयानंद के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी समाज और युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं।

युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने पर जोर

पीएम मोदी ने चिन्मय मिशन के युवा स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए बताया कि मिशन से जुड़े युवाओं ने 300 दिनों में लगभग 40 हजार किलोमीटर की यात्रा कर एक लाख से अधिक युवाओं तक पहुंचने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि ये युवा भारतीय मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद का मानना था कि युवा शक्ति के निर्माण से ही एक मजबूत और सक्षम भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा तथा मातृभाषा में शिक्षा को भी महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन के देशभर में 100 से अधिक शैक्षणिक संस्थान विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।

भारतीय विरासत के संरक्षण का किया उल्लेख

पीएम मोदी ने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या के श्रीराम मंदिर, उज्जैन के महाकाल महालोक और केदारनाथ-बद्रीनाथ जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के विकास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्राचीन धरोहरों को वापस लाने के प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियों को भारत वापस लाया गया है।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होंगे। इसी अवधि में चिन्मय मिशन भी अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मिशन से जुड़े आचार्य, साधक और स्वयंसेवक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देंगे।

उन्होंने समाज को विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ एकजुट करने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और देश के प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान और राष्ट्रीय आत्मविश्वास के आधार पर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

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