लोहरदगा: टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए इफको ने किसानों को किया जागरूक, नैनो उर्वरकों के उपयोग की दी जानकारी

लोहरदगा: जिले में टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से इफको लोहरदगा की ओर से 23 अक्टूबर को कुडू प्रखंड स्थित बंटी होटल में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नैनो उर्वरकों एवं जैविक उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों के बारे में बिक्री केंद्र प्रभारियों तथा किसानों को विस्तार से जानकारी दी गई।

Oct 23, 2026 - 17:33
लोहरदगा: टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए इफको ने किसानों को किया जागरूक, नैनो उर्वरकों के उपयोग की दी जानकारी

लोहरदगा: जिले में टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से इफको लोहरदगा की ओर से 23 अक्टूबर को कुडू प्रखंड स्थित बंटी होटल में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नैनो उर्वरकों एवं जैविक उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों के बारे में बिक्री केंद्र प्रभारियों तथा किसानों को विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में इफको झारखंड के राज्य विपणन प्रबंधक डॉ. शशिभूषण समदर्शी मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल हुए। वहीं, जिला कृषि पदाधिकारी श्रीमती कालेन खलखो विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इसके अलावा इफको रांची के क्षेत्र अधिकारी सुशील कुमार, कृषि स्नातक प्रशिक्षु प्रवल कुमार सिन्हा तथा इफको एमसी के रितेश श्रीवास्तव और महेश कुमार भी मौजूद रहे। प्रशिक्षण में 40 बिक्री केंद्र प्रभारियों और 30 किसानों ने भाग लिया।

नैनो उर्वरकों और जैविक खाद के फायदे बताए

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. शशिभूषण समदर्शी ने मिट्टी के भौतिक, जैविक और रासायनिक क्षरण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए एनपीके कंसोर्टियम, बायोडीकंपोजर और जैविक खाद के उपयोग के प्रति जागरूक किया।

उन्होंने नैनो डीएपी और एनपीके कंसोर्टियम के उपयोग एवं लाभों की जानकारी देते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाकर टिकाऊ खेती करने पर जोर दिया। नैनो डीएपी के बीज शोधन, जड़ शोधन और पत्तियों पर छिड़काव जैसे विभिन्न उपयोगों के बारे में भी बताया गया।

इसके साथ ही इफको नेचुरल पोटाश की विशेषताओं और पारंपरिक एमओपी उर्वरक के विकल्प के रूप में इसकी उपयोगिता पर चर्चा की गई। किसानों को नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और सागरिका के उपयोग तथा छिड़काव की विधि की जानकारी दी गई। फसलों में नैनो कॉपर के उपयोग और उसकी भूमिका पर भी चर्चा हुई।

रबी फसलों में उर्वरकों के सही इस्तेमाल पर जोर

इफको के क्षेत्र अधिकारी सुशील कुमार ने किसानों को विभिन्न जल घुलनशील उर्वरकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रबी फसलों में उनकी आवश्यकता और विकास की अवस्था के अनुसार उर्वरकों का इस्तेमाल करना जरूरी है।

जिला कृषि पदाधिकारी श्रीमती कालेन खलखो ने खेत बचाओ अभियान के तहत रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने और जैविक उर्वरकों को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने किसानों को नियमित रूप से मिट्टी की जांच कराने तथा स्वाइल हेल्थ कार्ड में दी गई सिफारिशों के अनुसार उर्वरकों का इस्तेमाल करने की सलाह दी।

फसल सुरक्षा और मिट्टी जांच की भी दी गई जानकारी

कार्यक्रम के दौरान इफको एमसी के रितेश श्रीवास्तव ने फसलों में लगने वाले प्रमुख रोगों एवं कीटों की पहचान और उनके प्रभावी प्रबंधन के उपाय बताए। उन्होंने फसल सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियों की जानकारी भी दी।

वहीं, प्रवल कुमार सिन्हा ने मिट्टी की जांच के लिए नमूना लेने की सही विधि समझाई। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ प्रशिक्षण सत्र का समापन हुआ।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य बिक्री केंद्र प्रभारियों और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, संतुलित पोषण, जैविक उर्वरकों तथा फसल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना रहा, ताकि मिट्टी की सेहत बनाए रखते हुए खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके।

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