44 साल बाद भी शहीद अजित-धनंजय के परिजनों को पेंशन और नौकरी का इंतजार, सरकारी शहीद का दर्जा नहीं मिलने का दावा
सरायकेला-खरसावां: झारखंड आंदोलन के इतिहास में दर्ज तिरुलडीह गोलीकांड के शहीद अजित महतो और धनंजय महतो का बलिदान आज भी लोगों को याद है। बुधवार को दोनों शहीदों के 44वें शहादत दिवस पर तिरुलडीह स्थित शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने शहीद वेदी पर माल्यार्पण कर दोनों वीर सपूतों को नमन किया। हालांकि, शहादत के 44 वर्ष बाद भी उनके परिजनों को सरकारी सहायता मिलने का इंतजार है।
सरायकेला-खरसावां: झारखंड आंदोलन के इतिहास में दर्ज तिरुलडीह गोलीकांड के शहीद अजित महतो और धनंजय महतो का बलिदान आज भी लोगों को याद है। बुधवार को दोनों शहीदों के 44वें शहादत दिवस पर तिरुलडीह स्थित शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने शहीद वेदी पर माल्यार्पण कर दोनों वीर सपूतों को नमन किया। हालांकि, शहादत के 44 वर्ष बाद भी उनके परिजनों को सरकारी सहायता मिलने का इंतजार है।
शहीद स्थल पर नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
तिरुलडीह स्थित शहीद स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में विधायक सविता महतो, जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो, जनसेवा ही लक्ष्य के संस्थापक एवं भाजपा नेता हरेलाल महतो, भाजपा नेता सह समाजसेवी खगेन महतो, JLKM के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो, केंद्रीय सचिव गोपेश महतो और आजसू नेता भोलानाथ महतो समेत कई लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शहीदों के योगदान को याद करते हुए उनके बलिदान को नमन किया। शहीदों के परिवारों से मुलाकात कर उनके प्रति संवेदना भी व्यक्त की गई।
पैतृक गांव पहुंचकर परिजनों से मिले लोग
शहादत दिवस के अवसर पर शहीद अजित महतो के पैतृक गांव कुरली पहुंचकर लोगों ने उनके परिजनों से मुलाकात की और श्रद्धासुमन अर्पित किए। वहीं, शहीद धनंजय महतो के पैतृक गांव चोगा-आदरडीह में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। लोगों ने शहीद की पत्नी और पुत्र से मिलकर उनके बलिदान को याद किया।
फूलों से सजा शहीद स्थल, मेले जैसा माहौल
शहादत दिवस को लेकर तिरुलडीह स्थित शहीद स्थल को फूलों से सजाया गया था। सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। पूरे परिसर में मेले जैसा माहौल देखने को मिला। दोपहर बाद आयोजित कार्यक्रम में तिरुलडीह गोलीकांड के दौरान आंदोलन में शामिल रहे लोगों और उनके परिजनों को सम्मानित भी किया गया।
44 साल बाद भी पेंशन और नौकरी की मांग
शहीदों के बलिदान को याद करने के साथ ही उनके परिजनों को सरकारी सहायता नहीं मिलने का मुद्दा भी एक बार फिर उठा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों शहीदों के परिवारों को अब तक पेंशन और परिवार के योग्य सदस्यों को सरकारी नौकरी का लाभ नहीं मिल पाया है। साथ ही, उन्हें सरकारी स्तर पर शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग भी उठ रही है।
हर साल शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन परिजनों की मांगों को लेकर सवाल बरकरार हैं। लोगों की मांग है कि सरकार शहीदों के योगदान को उचित सम्मान दे और उनके परिवारों को पेंशन, नौकरी सहित जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल करे।
झारखंड आंदोलन में योगदान देने वाले अजित महतो और धनंजय महतो की शहादत के 44 वर्ष बाद भी उनके परिजनों को सरकारी सहायता का इंतजार है। अब देखना होगा कि उनकी मांगों पर सरकार कब तक निर्णय लेती है।
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