BIG NEWS : बिहार में साइबर ठगी के अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़, 14.67 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा, 4 गिरफ्तार
PATNA : बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ने साइबर ठगी और अंतर्राष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पटना साइबर थाना की मदद से की गई इस कार्रवाई में ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ है, जो साइबर ठगी की रकम को फर्जी बैंक खातों के जरिए इधर-उधर भेजकर अंततः क्रिप्टो करेंसी में बदलने का काम कर रहा था. प्रारंभिक जांच में करीब 14 करोड़ 67 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन की बाते सामने आई है.
लंबे समय से साइबर अपराध से जुड़े अपराधी: गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कंकड़बाग निवासी गौतम गंभीर, विवान कुमार, रामकृष्णा नगर निवासी तनय सिंह और नालंदा जिले के हिलसा निवासी सुमित राज के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, चारों लंबे समय से संगठित तरीके से साइबर अपराध से जुड़े बैंक खातों का संचालन कर रहे थे.
इस मामले में पटना साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ कर पूरे गिरोह के बारे में जानकारी लेने की कोशिश कर रही है. पुलिस के मुताबिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अलग-अलग बैंकों में फर्जी दस्तावेजों या म्यूल अकाउंट के माध्यम से खाते खुलवाते थे.
क्या है म्यूल अकाउंट
गौरतलब है कि म्यूल अकाउंट एक ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका उपयोग जालसाज और साइबर अपराधी अवैध रूप से कमाए गए पैसे को छिपाने या एक जगह से दूसरी जगह भेजने यानि मनी लॉन्ड्रिंग के लिए करते है.यह खाता किसी निर्दोष व्यक्ति के नाम पर होता है, जिसे धोखे, लालच (कमीशन), या नौकरी के नाम पर फंसाकर अपराधी इस्तेमाल करते हैं.
चीन से जुड़े नेटवर्क के तार
ईओयू के हवाले से ये बताया गया है कि देशभर में साइबर ठगी से हासिल रकम पहले इन्हीं खातों में जमा कराई जाती थी. इसके बाद कई चरणों में पैसे को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर उसकी वास्तविक पहचान छिपाने की कोशिश की जाती थी. पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि ठगी की राशि को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेशी नेटवर्क तक पहुंचाया जा रहा था. इस नेटवर्क के तार चीन से जुड़े संचालकों तक होने की आशंका जताई जा रही है.
कॉरपोरेट बैंक खातों का इस्तेमाल
वहीं सीसीएसयू की जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह बड़े वित्तीय लेन-देन के लिए कॉरपोरेट बैंक खातों का इस्तेमाल करता था. पुलिस ने बताया कि जांच टीम को कुछ बैंक कर्मियों की संभावित भूमिका पर भी संदेह है. अधिकारियों का कहना है कि इस पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है. यदि किसी बैंक अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
बैंकिंग से जुड़े सामान बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में बैंकिंग और डिजिटल लेन-देन से जुड़े सामान बरामद किए हैं. इनमें 4 मोबाइल फोन, 6 बैंक पासबुक, 13 एटीएम कार्ड, 10 चेकबुक, 6 मोहर, 1 क्यूआर पेमेंट कोड और 8 सिम कार्ड शामिल हैं. जब्त दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके.
करीब 15 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन
पुलिस की जांच में पता चला है कि जब्त किए गए बैंक खातों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी की कई शिकायतें पहले से दर्ज हैं. शुरुआती आंकलन के अनुसार, इन खातों के माध्यम से करीब 14 करोड़ 67 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन हुए हैं. जांच एजेंसियां अब धन के स्रोत, लाभार्थियों और विदेशी कनेक्शन की गहन जांच कर रही हैं.
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