खान सर की अग्रिम जमानत पर 3 जुलाई को सुनवाई, कोर्ट ने मांगे गार्डों के हथियारों के दस्तावेज

Jun 30, 2026 - 16:31
खान सर की अग्रिम जमानत पर 3 जुलाई को सुनवाई, कोर्ट ने मांगे गार्डों के हथियारों के दस्तावेज

PATNA : पटना के सिविल कोर्ट में आज कोचिंग विवाद मामले में खान सर की एंटीसिपेटरी बेल याचिका और इनके दोनों गार्ड्स की जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी, जो अब 3 जुलाई को होगी।

लोक अभियोजक की ओर से कहा गया कि गार्ड्स के पास अवैध हथियार था। दहशत फैलाने के इरादे से फायरिंग की गई। बचाव पक्ष के वकील अरविंद मौआर ने कहा कि हथियार लाइसेंसी है। डॉक्यूमेंट्स वगैरह पुलिस ने जब्त कर लिया है इसीलिए कोर्ट ने आईओ और लोक अभियोजक से हथियार के डॉक्यूमेंट्स मांगे हैं। 3 जुलाई को आईओ डॉक्यूमेंट्स पेश करेंगे। तब तक खान को अंतरिम सुरक्षा मिलती रहेगी।

27 जून को हुई थी हियरिंग

खान सर की एंटीसिपेटरी बेल याचिका पर सुनवाई के दौरान खान पक्ष की ओर से कहा गया था- 'लगातार टाइम एक्सटेंड हो रहा है। इस पर आज ही बहस होनी चाहिए'। हालांकि, लोक अभियोजक और रौशन आनंद पक्ष की ओर से इसका विरोध किया गया। डायरी पढ़ने के लिए समय मांगा गया था। इस पर ही केस डायरी पढ़ने के लिए कोर्ट ने 3 दिन का समय दिया था।

दोनों बॉडीगार्ड्स के हथियार वेरिफिकेशन में हुए खुलासे

बता दें कि पटना पुलिस की जांच में फैजल खान (खान सर) के दोनों बॉडीगार्ड्स के हथियारों के वेरिफिकेशन के दौरान अहम जानकारियां सामने आई थीं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिस हथियार से गोली चलवाई गई थी, वह तालेबर सिंह (34), निवासी कासगंज (उत्तर प्रदेश) का है, लेकिन उसके नाम पर जारी हथियार लाइसेंस का परमिट पूरे भारत के लिए मान्य नहीं पाया गया।

आरोप है कि उतर प्रदेश से बिहार में हथियार लेकर आने, हथियार लेकर सुरक्षा ड्यूटी करने के लिए तालेबर सिंह के पास वैध अनुमति नहीं थी। फिर भी वह बिहार में बॉडीगार्ड की नौकरी कर रहा था। पुलिस ने फायरिंग में इस्तेमाल किए गए हथियारों और उनके लाइसेंस की जांच के बाद कई बिंदुओं को अपडेटेड केस डायरी में शामिल किया है।

थाने को नहीं दी सूचना, वेरिफिकेशन भी नहीं कराया

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तालेबर सिंह गैर कानूनी तरीके से हथियार लेकर बिहार में बॉडीगार्ड की नौकरी कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि बिहार में हथियार के साथ नौकरी करने की जानकारी स्थानीय प्रशासन, आर्म्स मजिस्ट्रेट या संबंधित थाने को नहीं दी गई थी, जो कानूनन अपराध है। बिना आवश्यक अनुमति के हथियार लेकर बिहार में काम करना कानून के दायरे में जांच का विषय है।

खान सर ने तालेबर सिंह को बॉडी गार्ड के तौर पर हायर किया, उन्होंने भी कभी इसका पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया। अपने साथ अवैध हथियार लेकर घूमते रहे फायरिंग भी करवा दी, जबकि उन्हें एक रिस्पॉन्सिबल व्यक्ति होने के चलते कानूनी प्रक्रिया को पूरी करनी चाहिए थी।

दूसरे बॉडीगार्ड के हथियार पर भी जांच

इसी तरीके से दूसरे बॉडीगार्ड प्रदीप कुमार का हथियार मैनपुरी यूपी का है। इस हथियार के वेरिफिकेशन के दौरान पता चला है कि ऑल ओवर इंडिया परमिट तो है, लेकिन ये प्रदीप के पिता की हत्या के बाद सेल्फ डिफेंस के लिए प्रोवाइड किया गया था, जिसका गलत इस्तेमाल इसने सिक्योरिटी एजेंसी के साथ मिलकर निजी फायदे के लिए किया। यह आर्म्स लाइसेंस के मानकों के अनुरूप नहीं है। पुलिस ने इन तमाम बिंदुओं का जिक्र अपनी अपडेटेड केस डायरी में भी किया है।

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