भरत तिवारी के ब्रह्मभोज में उमड़ा जनसैलाब, ढाई घंटे में 3000 से अध‍िक लोगों ने क‍िया भोजन, भोजपुर पुल‍िस-प्रशासन अलर्ट

Jun 30, 2026 - 16:46
Jun 30, 2026 - 16:47
भरत तिवारी के ब्रह्मभोज में उमड़ा जनसैलाब, ढाई घंटे में 3000 से अध‍िक लोगों ने क‍िया भोजन, भोजपुर पुल‍िस-प्रशासन अलर्ट

ARA : भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में आयोजित भरत तिवारी के ब्रह्मभोज में मंगलवार को भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धांजल‍ि सभा सह ब्रह्मभोज में बच्‍चे, युवाओं से लेकर मह‍िलाएं तक पहुंच रही हैं। शुरुआती ढाई तीन घंटे में तीन हजार से अधिक लोग यहां भोजन कर चुके हैं। 

बड़ी संख्या में लोग भरत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित करने भी पहुंच रहे हैं। आयोजकों द्वारा भोजन की व्यापक व्यवस्था की गई है। लोगों को टेबल-कुर्सियों के अलावा जमीन पर बिछी दरी पर बिठाकर भी भोजन कराया जा रहा है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भी अच्छी-खासी उपस्थिति देखने को मिली।

मिली जानकारी के अनुसार ब्रह्मभोज शुरू होने के महज ढाई घंटे के भीतर ही तीन हजार से अधिक लोग भोजन कर चुके थे। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, लोगों की संख्‍या बढ़ती जा रही है। बिलौटी गांव और उसके आसपास का इलाके में सुबह से ही चहल-पहल रही। आरा-बक्सर फोरलेन पर भी सैकड़ों की संख्या में बाइक, कार और अन्य छोटे-बड़े वाहनों की कतारें देखने को मिलीं।

मह‍िला-पुरुष सिपाह‍ियों को क‍िया गया प्रत‍िनियुक्‍त 

उधर, कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटने की सूचना के बाद प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर लगभग 300 से अधिक महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। आसपास के कई थानों की पुलिस को भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। इसके अलावा सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जो पूरे कार्यक्रम के दौरान गतिविधियों पर नजर रखते हुए आवश्यक सूचनाएं एकत्रित कर रहे हैं।

भरत तिवारी के माता-पिता ने सामाजिक सरोकार का परिचय देते हुए जवइनियां गांव के कटाव पीड़ित परिवारों के बीच वस्त्रों का वितरण किया। कटाव प्रभावित महिला एवं पुरुषों को साड़ी और धोती प्रदान की गई। माता आशा देवी और पिता काशीनाथ तिवारी ने कहा कि उनका पुत्र जवइनियां गांव के कटाव पीड़ित परिवारों की समस्याओं और उनके पुनर्वास की लड़ाई लगातार लड़ता रहा।

उन्होंने कहा कि इसी संघर्ष के दौरान उसने अपनी जान की बाजी लगा दी। ऐसे में उसे वापस तो नहीं लाया जा सकता। लेकिन उसके आदर्शों और समाज सेवा की भावना को आगे बढ़ाने का यह एक छोटा-सा प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह वस्त्र वितरण उनके पुत्र भरत तिवारी को सच्ची श्रद्धांजलि है।  

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