राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में मंत्री दीपिका सिंह ने केंद्र से मनरेगा की बकाया राशि देने और मजदूरी बढ़ाने की माँग की
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में झारखंड की आवाज बुलंद, दीपिका पांडेय सिंह ने उठाए मनरेगा, आवास और मजदूरी के बड़े मुद्दे।
दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दूसरे दिन झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने राज्य की ओर से विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को मजबूती से उठाया. उन्होंने महात्मा गांधी के नाम से नई ग्रामीण विकास योजना शुरू करने, मनरेगा के तहत 125 दिनों के रोजगार के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने, प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि बढ़ाने, मनरेगा की लंबित राशि का भुगतान करने और न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 433 रुपये करने की मांग केंद्र सरकार के समक्ष रखी. केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड के सुझावों पर सकारात्मक पहल करने का भरोसा दिया.
महात्मा गांधी के नाम से शुरू हो नई योजना
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि वी बी ग्राम जी योजना से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि महात्मा गांधी के नाम से नई जनहितकारी योजना शुरू की जाए. उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार और ग्रामीण विकास की अवधारणा आज भी देश के लिए प्रासंगिक हैं.
125 दिन रोजगार के लिए पर्याप्त बजट पर उठाए सवाल
सम्मेलन में मंत्री ने मनरेगा के तहत 125 दिनों का रोजगार देने की घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार लगातार मनरेगा का बजट घटा रही है तो अतिरिक्त 25 दिनों के रोजगार के लिए संसाधन कहां से आएंगे. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच 60-40 की हिस्सेदारी का नया प्रावधान झारखंड जैसे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है.
प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि बढ़ाने और फैब्रिकेटेड आवास का दिया सुझाव
दीपिका पांडेय सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की मांग रखी. उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में निर्माण लागत बढ़ चुकी है, इसलिए राशि बढ़ाना आवश्यक है. उन्होंने मजबूत फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर वाले आवास बनाने का सुझाव भी दिया ताकि समय पर आवास निर्माण पूरा हो सके और लाभुकों को एकमुश्त राशि मिलने से निर्माण में आने वाली बाधाएं समाप्त हों. इसके साथ ही उन्होंने अबुआ आवास योजना के तहत मनरेगा से 90 दिनों की मजदूरी भुगतान की मांग भी रखी. इस सुझाव पर केंद्रीय मंत्री ने भी सकारात्मक रुख दिखाया.
मनरेगा की 900 करोड़ रुपये बकाया राशि के भुगतान की मांग
मंत्री ने सम्मेलन में मनरेगा के मटेरियल मद में झारखंड की लगभग 900 करोड़ रुपये की लंबित राशि का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि बकाया राशि नहीं मिलने से ग्रामीण विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से वी बी ग्राम जी योजना लागू करने से पहले मनरेगा की लंबित राशि जारी करने का अनुरोध किया.
मनरेगा मजदूरी बढ़ाकर 433 रुपये करने की मांग
दीपिका पांडेय सिंह ने बढ़ती महंगाई और मजदूरों की जरूरतों का हवाला देते हुए मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 433 रुपये प्रतिदिन करने की मांग की. उन्होंने कहा कि वर्तमान में झारखंड में मनरेगा मजदूरों को 282 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं, जिसमें 255 रुपये केंद्र सरकार और 27 रुपये राज्य सरकार का योगदान है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यह राशि मजदूरों के जीवन-यापन के लिए पर्याप्त नहीं है.
रूरल इंडस्ट्री से सशक्त होंगी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं
मंत्री ने झारखंड में ग्रामीण उद्योगों की स्थापना पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 32 लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आजीविका और उद्यमिता के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रही हैं. यदि ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिले तो झारखंड की महिलाएं आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बन सकती हैं. उन्होंने कहा कि बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत झारखंड के आम की मांग दुबई, लंदन और इटली तक पहुंच चुकी है. वहीं स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार पलाश और अदिवा ब्रांड भी अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. उन्होंने बताया कि समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार 15 लाख नोटबुक जल्द ही स्कूली छात्रों तक पहुंचाई जाएंगी. साथ ही मईयां सम्मान योजना ने भी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में नई ताकत दी है.
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