सरला बिरला पब्लिक स्कूल में कला महोत्सव ‘प्रतिध्वनि’ का शुभारंभ

नॉलेज रिसोर्स क्यूरेटर श्री मुखर्जी पी. के मार्गदर्शन में आयोजित यह महोत्सव विद्यार्थियों को अंतरविषयी गतिविधियों के माध्यम से साहित्य, प्रदर्शन कला, आलोचनात्मक चिंतन एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के विविध आयामों का अनुभव कराने का अवसर प्रदान करता है।

Jul 18, 2026 - 18:21
सरला बिरला पब्लिक स्कूल में कला महोत्सव ‘प्रतिध्वनि’ का शुभारंभ

सरला बिरला पब्लिक स्कूल, राँची में तीन दिवसीय चतुर्थ राष्ट्रीय अंतर-विद्यालयी अंतरविषयी कला महोत्सव ‘प्रतिध्वनि’ का भव्य शुभारंभ गरिमामय समारोह के साथ हुआ। देश के विभिन्न विद्यालयों से आए युवा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की सहभागिता से आयोजित इस राष्ट्रीय महोत्सव ने साहित्य, प्रदर्शन कला, आलोचनात्मक चिंतन तथा सृजनात्मक अभिव्यक्ति को एक सशक्त मंच प्रदान किया। नॉलेज रिसोर्स क्यूरेटर श्री मुखर्जी पी. के मार्गदर्शन में आयोजित यह महोत्सव विद्यार्थियों को अंतरविषयी गतिविधियों के माध्यम से साहित्य, प्रदर्शन कला, आलोचनात्मक चिंतन एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के विविध आयामों का अनुभव कराने का अवसर प्रदान करता है। वर्षों के दौरान ‘प्रतिध्वनि’ रचनात्मकता, नवाचार एवं सहयोगात्मक अधिगम को प्रोत्साहित करने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच बन चुका है, जिसमें देशभर के अग्रणी विद्यालयों की सक्रिय सहभागिता रही है।

इस वर्ष इस महोत्सव में देशभर के 26 विद्यालयों के 450 से अधिक विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। वाद-विवाद, स्टोरीटेलिंग, रंगमंच, कविता, क्विज, रचनात्मक लेखन सहित साहित्यिक एवं कलात्मक प्रतियोगिताओं की विविध अंतरविषयी विधाओं में प्रतिभागी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। कार्यक्रम में सरला बिरला विश्वविद्यालय के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) गोपाल पाठक, कुलपति प्रो. (डॉ) सी. जेगनाथन, कुलसचिव प्रो. एस. बी. डांडिन, विभिन्न प्रतिष्ठित सीबीएसई विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं प्रधानाचार्याएँ, नॉलेज रिसोर्स क्यूरेटर श्री मुखर्जी पी., प्रख्यात थिएटर आर्टिस्ट एवं फिल्म निर्माता श्री मेघनाथ तथा निर्णायक मंडल के सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इसके पश्चात् सरला बिरला पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मनोहारी नृत्य-नाटिका ‘‘मंत्रा टू मशीन - ए डांस ओडिसी‘‘ ने उपस्थित सभी अतिथियों एवं दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अद्भुत प्रस्तुति में पंचतत्त्व-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के माध्यम से परंपरा से आधुनिक तकनीकी युग तक मानव सभ्यता की विकास यात्रा का अत्यंत प्रभावशाली चित्रण किया गया। आकर्षक नृत्य संयोजन, भावपूर्ण संगीत एवं सशक्त अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रकृति, मानव सभ्यता और नवाचार के संतुलित सहअस्तित्व का प्रेरणादायी संदेश प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति ने उपस्थित सभी दर्शकों को भाव-विभोर करते हुए सृजनात्मकता एवं अंतरविषयी अधिगम के उत्सव का वातावरण निर्मित कर दिया। उद्घाटन सत्र में श्री मुखर्जी पी. एवं माइम कलाकार श्री कुणाल मोटलिंग द्वारा ‘प्रदूषण‘ विषय पर प्रस्तुत प्रभावशाली मूकाभिनय आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। अपनी सशक्त एवं भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया, जिसने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।

अतिथियों का स्वागत करते हुए सरला बिरला पब्लिक स्कूल की प्राचार्या श्रीमती मनीषा शर्मा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल कक्षा-कक्ष तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन तथा समग्र व्यक्तित्व का विकास करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने झारखंड की समृद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनजातीय आंदोलनों के अमूल्य योगदान को रेखांकित किया और कहा कि उनका साहस, धैर्य तथा आत्म-अभिव्यक्ति की भावना आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि ‘प्रतिध्वनि’ ऐसा अनूठा मंच है, जहाँ बौद्धिकता और कल्पनाशीलता का सुंदर संगम होता है तथा विद्यार्थी आत्मविश्वासी संप्रेषक, संवेदनशील नागरिक और उत्तरदायी वैश्विक नागरिक के रूप में विकसित होते हैं।

प्रो. (डॉ.) गोपाल पाठक, महानिदेशक, सरला बिरला विश्वविद्यालय ने अपने संबोधन में कला एवं इतिहास के शाश्वत महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये दोनों किसी भी सभ्य समाज के निर्माण के आधार स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास हमें अपनी जड़ों, सांस्कृतिक पहचान और सभ्यता से परिचित कराता है, जबकि कला मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्ति प्रदान करते हुए सृजनशीलता और नवाचार को नई दिशा देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे समग्र शिक्षा के लिए इतिहास और कला, दोनों के महत्व को समान रूप से आत्मसात करें।

नॉलेज रिसोर्स क्यूरेटर श्री मुखर्जी पी. ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उनसे पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर अंतरविषयी अधिगम को अपनाने तथा बौद्धिक एवं रचनात्मक उत्कृष्टता की दिशा में निरंतर अग्रसर रहने का आह्वान किया।

प्रख्यात थिएटर आर्टिस्ट एवं फिल्म निर्माता श्री मेघनाथ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए सृजनात्मकता की परिवर्तनकारी शक्ति पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वतंत्र चिंतन करने, संवेदनशील दृष्टि विकसित करने तथा कला को कहानी कहने, नवाचार और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाने के लिए प्रेरित किया।

इस उद्घाटन समारोह के साथ तीन दिवसीय महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इसके साथ ही साहित्यिक, कलात्मक एवं बौद्धिक गतिविधियों से समृद्ध विविध आयोजनों की श्रृंखला प्रारंभ हुई। देश के विभिन्न विद्यालयों से आए युवा प्रतिभागियों को एक मंच पर एकत्रित करने वाला यह महोत्सव सृजनात्मकता, नवाचार, सहयोग की भावना तथा अंतर्विषयी चिंतन को प्रोत्साहित करते हुए युवा प्रतिभाओं को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का सशक्त अवसर प्रदान करेगा।

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