सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि 20 जुलाई को होनेवाले विरोध मार्च का नेतृत्व करेंगी
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा है कि बिना सहमति के उनके मुँह या नसों के ज़रिए कुछ भी नहीं दिया जाए.
नीट परीक्षा में हुए अनियमितताओं के ख़िलाफ़ सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 21वें दिन में प्रवेश कर गई है.
पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था और जंतर-मंतर पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है.
सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के जंतर-मंतर से हटाकर सफ़दरजंग अस्पताल ले जाया गया था.
दोपहर 3.30 बजे सफ़दरजंग अस्पताल ने 21 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम का हेल्थ बुलेटिन जारी किया है.
अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट की ओर से जारी बुलेटिन में बताया गया है कि सोनम वांगचुक ने ड्रिप और मुंह से किसी भी तरह का तरल पदार्थ लेने से मना कर दिया है.
सफ़दरजंग अस्पताल ने बताया है कि सोनम वांगचुक की पल्स, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन सेचुरेशन स्थिर है और शरीर में पानी की कमी के लक्षण देखे गए हैं.
अस्पताल ने कहा है कि उनके स्वास्थ्य के सर्वोत्तम हित में इलाज के लिए उनकी लगातार निगरानी की जा रही है और उन्हें उचित सलाह (काउंसलिंग) दी जा रही है.
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, लंबे समय तक उपवास करने के कारण उन्हें हल्की कमज़ोरी और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) की शिकायत है. फ़िलहाल उनकी हालत स्थिर है और सभी अन्य स्वास्थ्य मानक सामान्य हैं.
डॉ चारु बंबा ने कहा, "सोनम वांगचुक शनिवार सुबह क़रीब 7:40 बजे अस्पताल पहुँचे. लंबे समय से उपवास करने की वजह से उन्हें थोड़ी कमज़ोरी है और शरीर में पानी की हल्की कमी है."
डॉ चारु के मुताबिक़, "वांगचुक के सभी वाइटल पैरामीटर सामान्य हैं. उनकी लगातार निगरानी की जा रही है और उनका इलाज जारी है. वह पूरी तरह होश में हैं और उनकी हालत स्थिर है. अस्पताल पहुँचने पर सबसे पहले इमर्जेंसी मेडिसिन विभाग ने उनका इलाज किया. इसके बाद उन्हें मेडिसिन विभाग में भर्ती किया गया."
अस्पताल प्रशासन ने बताया, "वांगचुक पूरी तरह होश में हैं. शरीर में पानी की कमी के कारण उनके इलेक्ट्रोलाइट स्तर पर असर के संकेत मिले हैं. इसी वजह से उन्हें कुछ समय तक अस्पताल में निगरानी में रखा जाएगा. पहले इसे ठीक किया जाएगा और फिर उनकी हालत की दोबारा जांच की जाएगी."
अभिजीत दीपके की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स अकाउंट से घोषणा की गई है कि अभिजीत दीपके बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठेंगे.
सीजेपी ने कहा है, ''20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार निकाला जाएगा.
उन्होंने बताया, ''जब मैं यहाँ से सुबह सात बजे फ़्रेश होने के लिए निकला तभी पुलिस के लोग आए और सोनम सर को घसीटकर ले गए. भूख हड़ताल पर बैठे 60 साल के शख़्स को पुलिस ज़बरदस्ती ले गई. जब मैं अपने दोस्त के घर से जंतर-मंतर की ओर आ रहा था, तभी मुझे ख़बर मिली कि सोनम सर को पुलिस ले गई.''
उन्होंने कहा, ''पुलिस ने मेरे साथ भी मारपीट की. मैं विदेश से अपने देश लौटा हूँ तो क्या मैं अपराधी हूँ?''
डीसीपी नई दिल्ली ने इस मामले की जानकारी देते हुए एक्स पर लिखा है, ''दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के अनुसार, सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें ज़रूरी मेडिकल देखभाल के लिए हॉस्पिटल ले जाया गया है.''
वांगचुक की जान को खतरा : पत्नी गीतांजलि पहुंची अस्पताल
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा है कि बिना सहमति के उनके मुँह या नसों के ज़रिए कुछ भी नहीं दिया जाए.
गीतांजलि ने एक्स पर लिखा, ''मैं दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हूँ, जहाँ सोनम वांगचुक को भर्ती कराया गया है. कृपया उन्हें मुँह के ज़रिए या नसों के माध्यम से कोई भी दवा या तरल पदार्थ तब तक न दिया जाए, जब तक मुझसे, उनके परिवार से और पिछले 20 दिनों से उनकी सेहत पर नज़र रख रहे डॉक्टरों से सहमति न ले ली जाए.''
गीतांजलि ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, ''हमें बताया जा रहा है कि सोनम के शरीर में पोटैशियम का लेवल कम हो गया है और उनकी जान को ख़तरा है. कल पोटैशियम 4.3 था, जो अब 2.9 हो गया है. यहां के डॉक्टर्स का कहना है इससे उनकी जान को ख़तरा हो सकता है.''
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, "सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से यहां (सफ़दरजंग अस्पताल) लाया गया. इसके बारे में न तो उन्हें बताया गया और न ही मुझे. कल शाम ही सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने उनकी जांच की थी और उनके सभी स्वास्थ्य संकेत सामान्य थे."
गीतांजलि ने कहा, "अगर सोनम मार्च में शामिल नहीं हो पाएंगे, तो मैं उनकी जगह मार्च का नेतृत्व करूंगी. यह मार्च सोमवार को पहले से तय योजना के मुताबिक़ होगा. सिर्फ़ इसलिए कि सोनम को ज़बरदस्ती यहां लाया गया है, इसका मतलब यह नहीं कि मार्च को रोका जा सकता है."
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