ममता बनर्जी को एक और झटका, बंगाल टीएमसी अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सभी पदों से दिया इस्तीफा
NEWS DESK : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद अंदरूनी कलह और बिखराव से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को शनिवार को एक और झटका लगा. पार्टी की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व वरिष्ठ मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य (Chandrima Bhattacharya) ने पार्टी के सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है.
ऑथराइज्ड सिग्नेटरी के अधिकार भी छोड़े
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक पत्र भेजकर सूचित किया है कि वह प्रदेश अध्यक्ष के दायित्व से तत्काल प्रभाव से मुक्त हो रही हैं. उन्होंने न केवल अध्यक्ष पद छोड़ा है बल्कि पार्टी के सभी सांगठनिक पदों, बैंक खातों के आधिकारिक हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) के अधिकार और चुनाव आयोग के समक्ष ममता बनर्जी के अधिकृत प्रतिनिधि के तौर पर भी अपनी दावेदारी वापस ले ली है.
सुब्रत बख्शी की जगह मिली थी प्रदेश अध्यक्ष की कमान
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में निराशाजनक प्रदर्शन और टूट के बाद ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी में बड़ा फेरबदल किया था. 5 जून को ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर हुई राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में अनुभवी नेता सुब्रता बख्शी को हटाकर चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल टीएमसी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था.
दमदम उत्तर विधानसभा सीट से चुनाव हार गयीं थीं चंद्रिमा
हालांकि, इस चुनाव में चंद्रिमा खुद दमदम उत्तर (Dum Dum Uttar) विधानसभा सीट से भाजपा के सौरभ सिकदार से चुनाव हार गयीं थीं. चुनाव हारने के बावजूद पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गयी थी, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और आंतरिक गुटबाजी के कारण वे एक महीना भी इस पद पर नहीं टिक सकीं
नेताओं के पलायन के बीच इस्तीफे ने बढ़ायी मुश्किलें
चंद्रिता भट्टाचार्य का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब तृणमूल कांग्रेस पहले से ही चौतरफा कानूनी और राजनीतिक संकटों से घिरी हुई है. पार्टी के बागी नेता रीतब्रत बनर्जी के गुट की शिकायत के बाद बिधाननगर पुलिस और कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी के करीब 440 करोड़ रुपए वाले बैंक खातों पर रोक (Debit Freeze) लगा रखी है.
80 में 58 विधायक छोड़ चुके हैं ममता का साथ
विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी के 80 में से 58 विधायक पहले ही पाला बदलकर रीतब्रत बनर्जी के बागी धड़े में शामिल हो चुके हैं. ममता बनर्जी की बेहद करीबी चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस तरह पूरी तरह से सांगठनिक सांगठों से पीछे हट जाना इस बात का संकेत है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और अस्तित्व की जंग गंभीर मोड़ पर पहुंच चुकी है.
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