पंचायतों के लिए 14,231 करोड़ की अनुदान राशि, 16वें वित्त आयोग की कार्यशाला में झारखंड की दमदार पैरवी, मंत्री दीपिका ने उठाई अहम मांगें

Jul 3, 2026 - 18:43
पंचायतों के लिए 14,231 करोड़ की अनुदान राशि, 16वें वित्त आयोग की कार्यशाला में झारखंड की दमदार पैरवी, मंत्री दीपिका ने उठाई अहम मांगें

RANCHI : झारखंड की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला में राज्य की पंचायतों का पक्ष मजबूती से रखा. उन्होंने केंद्र सरकार से पंचायतों को मिलने वाली अनुदान राशि समय पर जारी करने और परफॉर्मेंस ग्रांट के मानकों में झारखंड जैसे राज्यों के लिए उदारता बरतने की मांग की. मंत्री ने कहा कि फंड मिलने में देरी होने से पंचायतों की विकास योजनाएं प्रभावित होती हैं.

2026-31 के बीच पंचायतों को मिलेगा 14,231 करोड़

दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि 16वें वित्त आयोग की अनुशंसा के तहत वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक झारखंड की पंचायतों को कुल ₹14,231 करोड़ की अनुदान राशि मिलेगी. इसमें ₹11,385 करोड़ बेसिक ग्रांट और ₹2,846 करोड़ परफॉर्मेंस ग्रांट शामिल है. उन्होंने कहा कि यदि यह राशि समय पर जारी होगी तो पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को नई गति मिलेगी.

15वें वित्त आयोग की बकाया राशि का भी उठाया मुद्दा

कार्यशाला के दौरान मंत्री ने 15वें वित्त आयोग के तहत झारखंड को मिलने वाली लंबित अनुदान राशि जारी करने की भी मांग की. उन्होंने कहा कि बकाया राशि मिलने से पंचायतों की कई रुकी हुई योजनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी. इस अवसर पर केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल भी मौजूद रहे.

अप्रयुक्त राशि पर स्पष्ट नीति बनाने की मांग

मंत्री ने कहा कि पूर्व वित्त आयोगों की अप्रयुक्त राशि के उपयोग को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं है. ऐसे में नई अनुदान राशि के उपयोग में व्यावहारिक दिक्कतें आ सकती हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से इस संबंध में जल्द स्पष्ट नीति बनाने की मांग की ताकि पंचायतों को किसी तरह की परेशानी न हो.

पंचायत कर्मियों और कमजोर राज्यों के लिए की अहम पैरवी

दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि पंचायत कर्मी ही योजनाओं को धरातल तक पहुंचाते हैं. इसलिए उन्हें मिलने वाली वित्तीय सहायता 16वें वित्त आयोग में भी जारी रहनी चाहिए. उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे राज्यों की अपनी राजस्व संग्रहण क्षमता सीमित है. ऐसे में परफॉर्मेंस ग्रांट तय करते समय राज्यों की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए. उन्होंने भरोसा जताया कि झारखंड सरकार पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है.

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