JPSC भर्ती घोटाला: रिजल्ट से पहले कंपनी को भेजी गई थी अभ्यर्थियों की सूची! चार्जशीट में 304 फोन कॉल का जिक्र
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) भर्ती घोटाले की जांच में सीआईडी की चार्जशीट से कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, प्रारंभिक परीक्षा (PT) का परिणाम जारी होने से पहले ही कुछ अभ्यर्थियों के नामों की सूची कथित तौर पर टीडीपीएल कंपनी को व्हाट्सऐप के जरिए भेजी गई थी। बताया गया है कि इस सूची में उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा के अभ्यर्थियों के नाम शामिल थे।
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) भर्ती घोटाले की जांच में सीआईडी की चार्जशीट से कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, प्रारंभिक परीक्षा (PT) का परिणाम जारी होने से पहले ही कुछ अभ्यर्थियों के नामों की सूची कथित तौर पर टीडीपीएल कंपनी को व्हाट्सऐप के जरिए भेजी गई थी। बताया गया है कि इस सूची में उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा के अभ्यर्थियों के नाम शामिल थे।
इस मामले में JPSC की तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के बीच हुई बातचीत भी जांच के दायरे में है। सीआईडी की चार्जशीट में दोनों के बीच 304 बार फोन पर बातचीत होने का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, केवल फोन कॉल्स की संख्या से किसी की संलिप्तता साबित नहीं होती। मामले में आरोपों और उनकी भूमिका का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
रिजल्ट से पहले सूची भेजने का क्या है मामला?
जांच से जुड़े विवरणों के अनुसार, पीटी परीक्षा का परिणाम घोषित होने से पहले कुछ अभ्यर्थियों के नामों वाली सूची टीडीपीएल कंपनी को व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजे जाने की बात सामने आई है। इस घटनाक्रम ने परीक्षा की गोपनीयता और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
अब जांच का अहम पहलू यह है कि सूची किसने तैयार की, उसे किस उद्देश्य से भेजा गया और क्या उसका परीक्षा के परिणाम या चयन प्रक्रिया पर कोई प्रभाव पड़ा। इन सवालों का जवाब जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों से ही स्पष्ट होगा।
श्वेता गुप्ता और एल. खियांग्ते के बीच 304 कॉल का जिक्र
सीआईडी की चार्जशीट में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते के बीच 304 बार फोन पर बातचीत होने का उल्लेख बताया गया है। जांच के संदर्भ में इन संपर्कों की अवधि, समय और मामले से संबंधित अन्य परिस्थितियां महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
हालांकि, फोन पर बातचीत होना अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि बातचीत किस विषय पर हुई थी और क्या उसका कथित अनियमितताओं से कोई संबंध था। इस संबंध में उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही कोई ठोस निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
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