झारखंड में 6 साल से महिला आयोग में नियुक्तियां नहीं, 5200 से अधिक मामले लंबित; कब मिलेगा महिलाओं को न्याय?

रांची: झारखंड में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के लिए गठित राज्य महिला आयोग लंबे समय से अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने के कारण चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग में पिछले छह साल से अध्यक्ष का पद खाली है और 5200 से अधिक मामले लंबित बताए जा रहे हैं। ऐसे में महिलाओं की शिकायतों की सुनवाई और उनके निस्तारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

Oct 27, 2026 - 11:34
झारखंड में 6 साल से महिला आयोग में नियुक्तियां नहीं, 5200 से अधिक मामले लंबित; कब मिलेगा महिलाओं को न्याय?

रांची: झारखंड में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के लिए गठित राज्य महिला आयोग लंबे समय से अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने के कारण चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग में पिछले छह साल से अध्यक्ष का पद खाली है और 5200 से अधिक मामले लंबित बताए जा रहे हैं। ऐसे में महिलाओं की शिकायतों की सुनवाई और उनके निस्तारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मामलों में पीड़ित महिलाएं न्याय की उम्मीद लेकर आयोग का रुख करती हैं। लेकिन आयोग में नियमित सुनवाई की व्यवस्था प्रभावित होने से शिकायतों के समाधान में देरी की चिंता बढ़ गई है। अब इस मुद्दे पर झारखंड की राजनीति भी तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस जल्द नियुक्तियों का भरोसा दे रहे हैं, जबकि भाजपा ने सरकार की कार्यशैली और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।

छह साल से खाली पद, 5200 से ज्यादा मामले लंबित

राज्य महिला आयोग का उद्देश्य महिलाओं की शिकायतों पर सुनवाई करना, उनके अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों को उठाना और संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की पहल करना है। लेकिन अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने से आयोग की कार्यप्रणाली प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

5200 से अधिक मामलों के लंबित होने का आंकड़ा इस मुद्दे को और गंभीर बनाता है। इन मामलों में सुनवाई और निस्तारण की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, लंबित मामलों की मौजूदा संख्या और उनमें से कितने मामलों में सुनवाई पूरी तरह रुकी हुई है, इसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

JMM ने अगले महीने पुनर्गठन का दिया भरोसा

महिला आयोग में नियुक्तियों को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता मनोज पांडे ने भरोसा जताया है कि अगले महीने आयोग के पुनर्गठन की दिशा में कदम उठाया जा सकता है। सत्ता पक्ष की ओर से दिए जा रहे इस आश्वासन के बाद अब महिलाओं को नियुक्तियों का इंतजार है।

हालांकि, आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कब तक होगी तथा लंबित मामलों की सुनवाई किस समय से नियमित रूप से शुरू हो पाएगी, इसे लेकर औपचारिक समयसीमा सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

कांग्रेस ने भी जल्द नियुक्तियों की बात कही

कांग्रेस ने भी महिला आयोग के पुनर्गठन को लेकर अपना पक्ष रखा है। पार्टी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा के मुताबिक, गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर समीक्षा चल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के सम्मान, उनके हक और अधिकारों की रक्षा को लेकर गंभीर है तथा जल्द ही अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी।

कांग्रेस के इस आश्वासन के बाद सवाल उठ रहा है कि लंबे समय से खाली पड़े पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया अब कब पूरी होगी। साथ ही, आयोग में लंबित शिकायतों की सुनवाई और निस्तारण में तेजी लाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, यह भी अहम है।

भाजपा ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

वहीं, भाजपा ने महिला आयोग में नियुक्तियां नहीं होने को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि महिला आयोग महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां वे अपनी समस्याएं और पीड़ा रख सकती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं है। प्रतुल शाहदेव ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों का मुद्दा उठाते हुए आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद लंबे समय से खाली रहने पर सवाल खड़े किए।

भाजपा का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि संबंधित संस्थाओं को सक्रिय रखना और शिकायतों पर समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

सबसे बड़ा सवाल: लंबित मामलों का क्या होगा?

महिला आयोग में नियुक्तियों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। एक तरफ JMM और कांग्रेस जल्द पुनर्गठन का भरोसा दे रहे हैं, वहीं भाजपा सरकार से जवाब मांग रही है। लेकिन इस राजनीतिक बहस के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल उन महिलाओं का है, जो न्याय की उम्मीद में अपनी शिकायतों के समाधान का इंतजार कर रही हैं।

अब देखना होगा कि सरकार आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कब करती है, लंबित मामलों के निस्तारण के लिए क्या व्यवस्था बनाती है और महिलाओं को शिकायतों की सुनवाई के लिए कब तक प्रभावी मंच उपलब्ध हो पाता है।

झारखंड में महिला आयोग का पुनर्गठन अब केवल नियुक्तियों का मुद्दा नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों, शिकायतों की सुनवाई और समय पर न्याय सुनिश्चित करने से जुड़ा सवाल बन गया है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0