जब केरल हुआ केरलम तो पटना क्यों नहीं पाटलिपुत्र? उपेन्द्र कुशवाहा ने राज्यसभा में उठाया सवाल

Aug 13, 2026 - 17:11
जब केरल हुआ केरलम तो पटना क्यों नहीं पाटलिपुत्र? उपेन्द्र कुशवाहा ने राज्यसभा में उठाया सवाल

NEW DELHI : राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने एक बार फिर पटना का नाम पाटलिपुत्र रखने की मांग उठाई है. उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा में चर्चा के दौरान यह बात रखी. बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 11 नए टाउनशिप नाम पाटलिपुत्र करने की बात कहीं है.

'पटना का नाम पाटलिपुत्र हो' 

राज्यसभा सांसद उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि केरल का नाम, जो उनका हक था उसके अनुकूल परिवर्तित करने का काम भारत सरकार ने किया है. यह केरल के लोगों की भावना से जुड़ा हुआ विषय है. एक ऐसी ही हम बिहार के लोगों की एक पुरानी भावना है. जिस भावना से मैं सदन को और सरकार को अवगत कराना चाहता हूं.

राष्ट्रीय लोक मोर्चा सुप्रीमो ने कहा कि कभी बिहार का इतिहास भारत का इतिहास हुआ करता था. हम इतिहास में बिहार के जिस स्वर्णिम काल को जानते है, वह बिहार का इतिहास था. और इस वक्त भारत की राजधानी वहीं होती थी. और उस राजधानी से बर्मा से लेकर अफगानिस्तान तक शासन चलता था. उस वक्त जो राजधानी थी, आज जिसका नाम पटना है. उस वक्त उसका नाम पाटलिपुत्र हुआ करता था. ''जब देश में राज्यों का शहरों का नाम बदल रहा है, ऐसे में हमारी भी उम्मीद है कि क्यों न पाटलिपुत्र का नाम पटना कर दिया जाय.''

'जेपी नड्डा को गुदगुदी' 

उन्होंने कहा कि जेपी नड्डा सदन में है, इनका भी बिहार से पुराना संबंध रहा है. जब मैं बिहार की गौरव की बात करता हूं तो जरूर इनके मन में भी गुदगुदी होती होगी इसलिए अभी मौका है, दिल्ली और बिहार में हमारी गठबंधन की सरकारें हैं, इसलिए कोई दिक्कत नहीं होगी. उन्होंने कहा कि, पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र कर दिया जाय. यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि अपनी विरासत को सम्मान देने का विषय है.

'केरल' का नाम होगा 'केरलम'

दरअसल, राज्यसभा में एक विधेयक पारित करते हुए केरल का नाम केरलम करने की मंजूरी दे दी गई. इससे पहले मंगलवार को लोकसभा में विधेयक को मंजूरी दी गई थी. अब विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद आधिकारिक रूप से केरल राज्य का नाम बदलकर केरलम कर दिया जाएगा.

शहर का नाम बदलने का क्या है नियम? 

अब सवाल ये उठता है कि किसी शहर का नाम बदलने की प्रक्रिया और नियम क्या है. दरअसल किसी शहर का नाम बदलने के लिए राज्य सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पारित करती है, जिसके बाद केन्द्री की तरफ से अनापत्ति प्रमाण प्रत्र के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होती है.

केन्द्र की हां के बाद भी लंबी प्रक्रिया

केन्द्र की तरफ से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद रेल मंत्रालय, डाक विभाग, इंटेलिजेंस ब्यूरो और सर्वे ऑफ इंडिया की मंजूरी लेनी होती है, जिसके बाद जाकर केन्द्र सरकार अधिसूचना जारी करती है.

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