पितृपक्ष मेले में सफाई व्यवस्था पर रहेगा विशेष जोर, ड्रोन से होगी निगरानी, श्रद्धालुओं के लिए मेला क्षेत्र में लगाए जाएंगे सोलर वाटर एटीएम, लेजर लाइट शो से दिखेगा गयाजी का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
गयाजी। नगर निगम ने पितृपक्ष मेले की तैयारियों को लेकर कमर कस ली है। बुधवार को नगर निगम सभागार में मेयर वीरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में हुई सशक्त स्थायी समिति की बैठक में मेले को लेकर विशेष कार्ययोजना तैयार की गई। जबकि बैठक संचालन समिति के सदस्य अखौरी ओंकार
नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव ने किया। इस बार 25 सितंबर से शुरू होने वाले विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ सफाई व्यवस्था और निगरानी पर विशेष जोर दिया जाएगा। मेला क्षेत्र में सफाई का काम आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराया जाएगा। जबकि इसकी निगरानी ड्रोन से की जाएगी।
मेयर ने कहा कि गयाजी की पहचान पितृपक्ष मेला और पिंडदान की परंपरा से जुड़ी है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में नगर निगम की जिम्मेदारी है कि उन्हें बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसी उद्देश्य से इस बार मेले में कई नई व्यवस्थाएं की जा रही हैं। बैठक में डिप्टी मेयर चिंता देवी, नगर आयुक्त डा. गगन,मनोज कुमार, विनोद कुमार यादव,सारिका कुमारी, तब्बसुम परवीन, उप नगर आयुक्त, कार्यपालक अभियंता, जेई व एई सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
सफाई वोट से होगी फल्गु नदी की सफाई
पितृपक्ष मेले के दौरान फल्गु नदी की सफाई व्यवस्था को भी विशेष रूप से मजबूत किया जाएगा। नदी में आधुनिक सफाई नाव के माध्यम से 24 घंटे सफाई कराने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य नदी के पानी को स्वच्छ रखना है, ताकि पिंडदानियों को कर्मकांड के लिए फल्गु का पवित्र जल उपलब्ध हो सके। नगर निगम मेला अवधि में नदी और उसके आसपास की सफाई पर लगातार निगरानी रखेगा। तीर्थयात्रियों को शुद्ध और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराने के लिए इस बार मेला क्षेत्र में सोलर वाटर एटीएम लगाए जाएंगे। नगर निगम की योजना है कि प्रमुख स्थानों पर श्रद्धालुओं को आसानी से पेयजल मिल सके। सोलर आधारित व्यवस्था से बिजली की निर्भरता भी कम होगी। भीड़ वाले स्थानों पर पेयजल की उपलब्धता बनाए रखने को लेकर निगम की ओर से विशेष व्यवस्था की जाएगी।
लेजर लाइट से बताएंगे गयाजी का महत्व
पितृपक्ष मेले में इस बार लेजर लाइट के माध्यम से गयाजी के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी भी तीर्थयात्रियों को दी जाएगी। मेला क्षेत्र में लेजर लाइट शो की व्यवस्था की जाएगी, जिसके जरिए गयाजी की धार्मिक मान्यताओं और महत्व को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। इससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को गया की धार्मिक विरासत को जानने का अवसर मिलेगा। ब्रह्मसरोवर में कई वर्षों से बंद पड़े लाइट एंड साउंड कार्यक्रम को भी पितृपक्ष मेले के दौरान फिर से चालू करने की तैयारी है। बैठक में इसे लेकर भी योजना पर चर्चा की गई। इसके चालू होने से ब्रह्मसरोवर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण बढ़ेगा।
बिना बोर्ड अनुमति 40 लाख की निकासी पर स्वच्छता पदाधिकारी को विभागीय कार्रवाई का निर्णय
बैठक में नगर निगम की कार्यप्रणाली और राशि के इस्तेमाल को लेकर भी सदस्यों ने सवाल उठाए। स्वच्छता पदाधिकारी शुभम कुमार द्वारा सशक्त व बोर्ड की अनुमति के बिना करीब 40 लाख रुपये की राशि निकासी का मामला बैठक में उठाया गया। इस पर मेयर और नगर आयुक्त ने स्वच्छता पदाधिकारी को कड़ी फटकार लगाई। सवाल किया गया कि बोर्ड की अनुमति के बिना राशि की निकासी कैसे की गई और उससे दीवार पेंटिंग का काम किस आधार पर कराया गया। नगर आयुक्त ने मामले की जांच कराने की बात कही। साथ ही स्वच्छता पदाधिकारी को 90 दिनों के अंदर राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया। राशि का भुगतान नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई के साथ निलंबन वापस करने निर्णय लिया गया है।
दस दिनों में नाले-नालियों की सफाई पूरी करने का निर्देश
बैठक में शहर के नाले और नालियों की सफाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। समिति के सदस्य मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि कई वार्डों के क्षेत्रों में नाले और नालियों की सफाई अब तक पूरी तरह नहीं हुई है। थोड़ी वर्षा होने पर ही शहर में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो जा रही है। समिति सदस्य मोहन श्रीवास्तव ने हर हाल में दस दिनों के अंदर नाले और नालियों की सफाई पूरी करने की आदेश दिया। उन्होंने कहा कि समय रहते सफाई नहीं होने पर पितृपक्ष मेले के दौरान परेशानी बढ़ सकती है।
विकास कार्यों की निगरानी को बनेगी टीम
शहर में चल रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की निगरानी के लिए बैठक में एक विशेष टीम बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। टीम में तीन वार्ड पार्षद और तीन अभियंता शामिल होंगे। यह टीम विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों का स्थल निरीक्षण करेगी और उसकी रिपोर्ट नगर निगम कार्यालय को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित ठेकेदार को राशि का भुगतान किया जाएगा। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में सुधार और अनियमितता पर अंकुश लगाने की उम्मीद है।