भारतीय संस्कृति से प्रभावित विदेशी श्रद्धालु, अक्षयवट में किया पूर्वजों का पिंडदान
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भारतीय वेशभूषा में पूरा किया कर्मकांड, अक्षयवट से सुफल का आशीर्वाद लेकर लौटेंगे अपने देश
गयाजी। विश्वभर में पूर्वजों को मोक्ष प्रदान करने वाली मोक्षस्थली के रूप में प्रसिद्ध गयाजी में रविवार को पितृपक्ष मेले के तीसरे दिन विदेशी पर्यटकों के एक दल ने अक्षयवट वेदी पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति एवं मोक्ष की कामना को लेकर पिंडदान और कर्मकांड किया। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से प्रभावित विदेशी श्रद्धालु भारतीय वेशभूषा में अक्षयवट पहुंचे और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से अपने पूर्वजों का श्राद्ध कर्म संपन्न किया। गयापाल पंडा कटरियार ने विदेशी श्रद्धालुओं को पिंडदान एवं अन्य धार्मिक कर्मकांड की विधि पूरी कराई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गयाजी की धार्मिक परंपराओं और पिंडदान की प्राचीन पद्धति को करीब से समझा। गया पहुंचे विदेशी पर्यटकों ने कहा कि वे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से काफी प्रभावित हैं। गयाजी आकर पूर्वजों के निमित्त पिंडदान करना उनके लिए आध्यात्मिक अनुभव रहा। लोकनाथ गौड़ दास ने बताया कि विदेशी श्रद्धालुओं के इस दल का तीन दिवसीय कार्यक्रम संपन्न हो गया है। अब विदेशी श्रद्धालुओं के दूसरे जत्थे का कार्यक्रम 7 अक्टूबर से आयोजित किया जाएगा। कर्मकांड पूरा करने के बाद विदेशी श्रद्धालु अक्षयवट में सुफल का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने-अपने देश लौटेंगे।
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