फर्जी खबरों पर लगाम लगाता है PIB Fact Check Unit, ऐसे होती है दावों की जांच
नई दिल्ली: सोशल मीडिया के दौर में फर्जी, भ्रामक और गलत सूचनाओं का प्रसार तेजी से बढ़ा है। ऐसी सूचनाओं से जनता के बीच भ्रम पैदा होने के साथ-साथ सरकारी संस्थानों पर भरोसा भी प्रभावित हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) लंबे समय से सही और विश्वसनीय सरकारी जानकारी लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ फर्जी दावों का खंडन करता है।
नई दिल्ली: सोशल मीडिया के दौर में फर्जी, भ्रामक और गलत सूचनाओं का प्रसार तेजी से बढ़ा है। ऐसी सूचनाओं से जनता के बीच भ्रम पैदा होने के साथ-साथ सरकारी संस्थानों पर भरोसा भी प्रभावित हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) लंबे समय से सही और विश्वसनीय सरकारी जानकारी लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ फर्जी दावों का खंडन करता है।
भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत PIB ने नवंबर 2019 में Fact Check Unit (FCU) की स्थापना की थी। यह यूनिट केंद्र सरकार, उसके मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य केंद्रीय सरकारी संगठनों से संबंधित दावों की तथ्य-जांच करती है।
कैसे काम करता है PIB Fact Check Unit?
लोग WhatsApp, ईमेल या वेब पोर्टल के माध्यम से किसी संदिग्ध सरकारी दावे की जानकारी भेज सकते हैं। PIB Fact Check Unit इन अनुरोधों की जांच करता है और केंद्र सरकार से संबंधित मामलों को आगे कार्रवाई के लिए लिया जाता है।
दावों की जांच के दौरान सरकारी आधिकारिक स्रोतों, तकनीकी माध्यमों और संबंधित सरकारी विभाग से प्राप्त जानकारी के जरिए कई स्तरों पर सत्यापन किया जाता है। जांच के बाद जरूरत पड़ने पर PIB Fact Check अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से Fact Check जारी करता है।
तीन श्रेणियों में होती है जानकारी की पहचान
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Fake: सरकार से संबंधित पूरी तरह गलत या तथ्यहीन जानकारी।
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Misleading: आधी-अधूरी, चुनिंदा या तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश की गई जानकारी।
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True: जांच के बाद तथ्यात्मक रूप से सही पाई गई जानकारी।
PIB Fact Check Unit का उद्देश्य लोगों तक सटीक, आधिकारिक और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना तथा फर्जी और भ्रामक दावों से जनता को सचेत करना है।
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