उच्च शिक्षा विधेयक पर शिक्षकों ने बुलंद की स्वायत्तता की आवाज, शिक्षक दिवस पर जेजे कॉलेज में संवाद सभा, शिक्षक-कर्मचारी, विद्यार्थी व अभिभावकों ने की व्यापक चर्चा
गयाजी। शिक्षक दिवस के अवसर पर शनिवार को जगजीवन महाविद्यालय, गयाजी में प्रस्तावित उच्च शिक्षा विधेयक-2026 के परिप्रेक्ष्य में संवाद सभा का आयोजन किया गया। इसमें शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी, विद्यार्थी एवं अभिभावक शामिल हुए। सभा में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता का औचित्य’ विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता शिक्षा की गुणवत्ता, अकादमिक स्वतंत्रता और विद्यार्थियों के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में विधेयक के प्रावधानों पर सभी पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक है।
संवाद सभा का संचालन हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. संगीता कुमारी ने किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार का बदलाव शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की सहभागिता से होना चाहिए। उच्च शिक्षण संस्थानों के निर्णयों में अकादमिक स्वतंत्रता और संस्थागत स्वायत्तता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव से पहले हो व्यापक विमर्श
सभा को संबोधित करते हुए मगध क्षेत्र के प्रक्षेत्रीय अध्यक्ष राजीव कुमार भास्कर ने कहा कि शिक्षक दिवस पर आयोजित संवाद सभा केवल शिक्षक सम्मान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर विषयों पर भी खुलकर चर्चा जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हाईस्कूल स्तर पर विद्यार्थियों को पर्याप्त शैक्षणिक सुविधाएं और आधारभूत संरचना नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में आवश्यक व्यवस्था किए बिना शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव करना उचित नहीं होगा।
डॉ. संगीता कुमारी ने कहा कि उच्च शिक्षा विधेयक का प्रभाव केवल शिक्षकों और कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों और अभिभावकों पर भी इसका असर पड़ेगा। इसलिए सभी संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता बरकरार रखने की मांग की।
विधेयक के प्रावधानों पर जताई चिंता
संवाद सभा की अध्यक्षता करते हुए शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि प्रस्तावित उच्च शिक्षा विधेयक-2026 के प्रावधानों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखे बिना शिक्षा व्यवस्था में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता अकादमिक स्वतंत्रता के लिए आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों की चिंताओं को सरकार तक पहुंचाने तथा सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक संवाद की आवश्यकता बताई।
प्रो. डॉ. अनुरानी ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक के विरोध में राज्य के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आंदोलन चल रहा है। पिछले माह शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय पहुंचकर धरना-प्रदर्शन भी किया था। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मांगों और चिंताओं पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
शिक्षकों की भूमिका और संस्थानों की गरिमा जरूरी
प्राचार्य डॉ. मो. अयूब ने शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षकों को सम्मानजनक वातावरण देने के साथ शिक्षण संस्थानों की गरिमा और स्वायत्तता बनाए रखना जरूरी है।
शिक्षकेतर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक को लेकर शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी चिंतित हैं। सरकार को विधेयक के प्रावधानों पर व्यापक चर्चा करनी चाहिए तथा कर्मचारियों के हितों का भी ध्यान रखना चाहिए।
अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. पूर्णेंदु झा ने कहा कि स्वायत्तता उच्च शिक्षा की मूलभूत जरूरत है। सरकार द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में अनावश्यक आंतरिक हस्तक्षेप के बिना अकादमिक गतिविधियों के विकास को बढ़ावा दिया जाना समय की मांग है।
शिक्षकों ने रखे अपने विचार
संवाद सभा को जंतु विज्ञान विभाग के अध्यक्ष रवि रंजन, भौतिक विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. हिमांशु कुमार सुधांशु, गणित विभाग के अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार, मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन, भौतिक विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. निरुपमा कुमारी, भूगोल विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सत्येंद्र सिंह चंद्र तथा भौतिक विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. नारायण कुमार ने भी संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी है, लेकिन इसके साथ शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता, शिक्षकों की भूमिका और विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी, विद्यार्थी, अभिभावक एवं अन्य लोग उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन शिक्षकेतर कर्मचारी संघ के सचिव मोहम्मद जफर अली ने किया।