भर्ती परीक्षा घोटाले पर भाजपा का बड़ा आरोप, मृत्युंजय शर्मा बोले- ‘बड़े लोगों तक पहुंची आंच, सीबीआई जांच जरूरी’

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा ने भर्ती परीक्षा घोटाले की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सामने आ रहे तथ्यों से संकेत मिलता है कि मामला केवल कुछ अभ्यर्थियों या निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

Sep 6, 2026 - 09:11
Sep 6, 2026 - 09:18
भर्ती परीक्षा घोटाले पर भाजपा का बड़ा आरोप, मृत्युंजय शर्मा बोले- ‘बड़े लोगों तक पहुंची आंच, सीबीआई जांच जरूरी’

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा ने भर्ती परीक्षा घोटाले की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सामने आ रहे तथ्यों से संकेत मिलता है कि मामला केवल कुछ अभ्यर्थियों या निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

मृत्युंजय शर्मा ने जेपीएससी की एसीएफ-एफआरओ परीक्षा का हवाला देते हुए दावा किया कि जांच में स्ट्रॉन्ग रूम से उत्तर पुस्तिकाएं बाहर निकालकर विशेषज्ञों से लिखवाने, बाद में उन्हें वापस जमा कराने और उत्तर पुस्तिकाओं में डिजिटल माध्यम से बदलाव किए जाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। उन्होंने करीब 30 उत्तर पुस्तिकाओं को बाहर ले जाने और लगभग 40 उत्तर पुस्तिकाओं में पीडीएफ एडिटर के जरिए बदलाव किए जाने की बात कही।

भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, करीब 100 अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से सफल कराने के लिए करोड़ों रुपये की वसूली तथा लगभग 1.20 करोड़ रुपये के नकद लेन-देन से जुड़े तथ्य भी जांच में सामने आने का दावा किया गया है। उन्होंने परीक्षा के प्रश्नों को बाहर ले जाने, विशेषज्ञों से उत्तर लिखवाने और खाली ओएमआर शीट भरने के लिए बाहरी लोगों के इस्तेमाल जैसे आरोपों पर भी गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि स्ट्रॉन्ग रूम से उत्तर पुस्तिकाएं बाहर निकाली गईं, तो इतनी सुरक्षित व्यवस्था के बावजूद ऐसा संभव कैसे हुआ? परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों तक बाहरी लोगों की पहुंच किस स्तर पर बनी और उन्हें बाहर ले जाने तथा वापस जमा कराने में किसकी भूमिका रही—इन सभी बिंदुओं की गहन जांच जरूरी है।

मृत्युंजय शर्मा ने जेएसएससी-सीजीएल मामले में पिछली सीआईडी जांच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले की जांच और वर्तमान में सामने आ रहे तथ्यों के बीच अंतर को देखते हुए यह पता लगाया जाना चाहिए कि जांच की दिशा क्यों बदली और किन परिस्थितियों में गंभीर आरोपों को अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया।

भाजपा ने मांग की है कि जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों या बिचौलियों तक सीमित न रहे। प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्र, ओएमआर शीट, उत्तर पुस्तिका, मूल्यांकन, सॉफ्टवेयर और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जाए। साथ ही अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की संभावित भूमिका तथा कथित प्रशासनिक या राजनीतिक संरक्षण की भी पड़ताल हो।

मृत्युंजय शर्मा ने कहा कि राज्य की एजेंसी के बजाय सीबीआई जैसी स्वतंत्र केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने पर ही पूरे मामले की निष्पक्ष तस्वीर सामने आ सकेगी। भाजपा ने झारखंड में पिछले वर्षों में हुई प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं को भी जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की है।

हालांकि, ये सभी आरोप भाजपा प्रवक्ता द्वारा लगाए गए दावे हैं; इनकी अंतिम पुष्टि संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों से होगी।

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