बारूडीह में तीन दिवसीय अखंड हरि कीर्तन का शुभारंभ

डॉ.राजाराम महतो ने की राधा-कृष्ण की पूजा-अर्चना

Jun 6, 2026 - 20:54
बारूडीह में तीन दिवसीय अखंड हरि कीर्तन का शुभारंभ

रांची के राहे प्रखंड के बारूडीह गांव में तीन दिवसीय अखंड हरि कीर्तन का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। आयोजन के प्रथम दिन पंचपरगना क्षेत्र की विभिन्न कीर्तन मंडलियों ने हरिनाम संकीर्तन और राधा-कृष्ण भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे गांव को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। कीर्तन स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही और गांव में आध्यात्मिक उल्लास का माहौल देखने को मिला।

इस अवसर पर कुरमाली भाषा-संस्कृति के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रख्यात शिक्षाविद एवं भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की राष्ट्रीय पुस्तकालय सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. राजाराम महतो अपने पैतृक गांव बारूडीह पहुंचे। उन्होंने भगवान श्री राधा-कृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इसके बाद वे कीर्तन मंडलियों के साथ शामिल हुए और छाल बजाकर हरिनाम संकीर्तन में भाग लिया। उनकी उपस्थिति से श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में विशेष उत्साह का माहौल देखने को मिला।

कार्यक्रम में काफी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लेकर हरिनाम संकीर्तन का आनंद लिया। आयोजन स्थल पर भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। ग्रामीणों ने बताया कि बारूडीह में वर्षों से अखंड हरि कीर्तन की परंपरा चली आ रही है, जो सामाजिक एकता और धार्मिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करती है।

इस अवसर पर डॉ. राजाराम महतो ने कहा कि हरि कीर्तन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और संस्कारों को जीवित रखने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि महाप्रभु चैतन्य द्वारा प्रचारित हरिनाम संकीर्तन की परंपरा आज भी लोगों को प्रेम, भाईचारे और भक्ति के सूत्र में बांधने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक संरक्षण और आध्यात्मिक जागरण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

उन्होंने लोगों से अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को सहेजकर रखने का आह्वान करते हुए कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज की पहचान को मजबूत बनाते हैं तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।

कार्यक्रम को सफल बनाने में दिलेश्वर महतो, सिदाम महतो, गणेश महतो, सुरेश चंद्र महतो, मृत्युंजय महतो, अशोक महतो, बसंत कुमार महतो, रमेश महतो, गौर चंद्र महतो, सोहन महतो, कालोचंद महतो, कृष्णा महतो, परीक्षित महतो, राकेश महतो, धीरेन महतो, जितेंद्र महतो सहित अनेक ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

तीन दिवसीय अखंड हरि कीर्तन के पहले दिन का आयोजन भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता का सुंदर उदाहरण बनकर उभरा। आगामी दो दिनों तक विभिन्न कीर्तन मंडलियों द्वारा हरिनाम संकीर्तन एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

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