JPSC विवाद पर सियासत तेज: बाबूलाल मरांडी ने सदस्य जमाल अहमद को हटाने और ACB जांच की उठाई मांग
RANCHI : झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC इन दिनों विवादों के केंद्र में है. 11वीं से 14वीं JPSC सिविल सेवा PT परीक्षा में गड़बड़ी की खबरों के बाद छात्रों का गुस्सा अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब इस मुद्दे पर सियासत पूरी तरह गरमा गई है. छात्र सड़कों पर हैं और राजनीतिक दल आमने-सामने.
इस बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के एक खत ने सूबे की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर JPSC के सदस्य जमाल अहमद को तुरंत पदमुक्त करने और उनकी अकूत संपत्ति की ACB से जांच कराने की मांग की है. बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि जमाल अहमद ने अपने पद का दुरुपयोग कर चल और अचल संपत्ति का एक विशाल साम्राज्य खड़ा कर लिया है।
बाबूलाल मरांडी का कहना है कि जिस शख्स के हाथ में राज्य के लाखों युवाओं का भविष्य है, उसका अपना अतीत ही गहरे विवादों में घिरा हुआ है. इतना ही नहीं, मरांडी ने जमाल अहमद की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया है. उन्होंने कहा कि पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के दबाव में नियमों को ताक पर रखकर यह नियुक्ति की गई." एक घोटालेबाज की सिफारिश पर दूसरे विवादित चेहरे को संवैधानिक पद सौंप देना...क्या यही सरकार के कामकाज का तरीका है?"
आपको बता दें कि जमाल अहमद पहले एक प्राथमिक शिक्षक थे. 2008 में लेक्चरर पद पर हुई उनकी नियुक्ति खुद CBI की जांच के दायरे में है. नेता प्रतिपक्ष ने साफ कहा है कि जब तक ऐसे दागी लोग संवैधानिक पदों पर रहेंगे, JPSC पर युवाओं का भरोसा कभी नहीं बन सकता.
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