चीन के नए रक्षा कानून से भारत की बढ़ी चिंता, LAC पर क्या हो सकता है असर?
चीन ने अपने राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून में बड़ा बदलाव किया है। 2010 के बाद पहली बार किए गए इस संशोधन से चीनी सरकार को युद्ध या राष्ट्रीय संकट की स्थिति में नागरिक संसाधनों, उद्योग, तकनीक, डेटा और अन्य क्षमताओं को तेजी से रक्षा व्यवस्था में शामिल करने की अधिक ताकत मिल गई है। नया कानून 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।
चीन ने अपने राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून में बड़ा बदलाव किया है। 2010 के बाद पहली बार किए गए इस संशोधन से चीनी सरकार को युद्ध या राष्ट्रीय संकट की स्थिति में नागरिक संसाधनों, उद्योग, तकनीक, डेटा और अन्य क्षमताओं को तेजी से रक्षा व्यवस्था में शामिल करने की अधिक ताकत मिल गई है। नया कानून 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।
संशोधित कानून में सिर्फ संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता ही नहीं, बल्कि चीन के ‘विकास हितों’ को भी रक्षा लामबंदी के आधार में शामिल किया गया है। इसके तहत टेलीकॉम, साइबर सुरक्षा, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वायत्त तकनीक जैसे क्षेत्रों को भी राष्ट्रीय रक्षा तैयारियों से जोड़ा गया है।
भारत के लिए इसकी अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि भारत-चीन सीमा पर LAC को लेकर तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में चीन की सैन्य और औद्योगिक क्षमता को तेजी से एकजुट करने की व्यवस्था किसी लंबे सीमा संकट की स्थिति में रणनीतिक चुनौती बन सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत को भी रक्षा उत्पादन, सीमा infrastructure, रणनीतिक भंडार, सप्लाई चेन, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण डिजिटल नेटवर्क को और मजबूत करने की जरूरत है।
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