आंगनवाड़ी को लेकर बड़ा अभियान: 9 सितंबर से शुरू होगा 9वां राष्ट्रीय पोषण माह, समुदाय की भागीदारी पर जोर
नई दिल्ली: देशभर में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के पोषण एवं शुरुआती विकास को मजबूत करने के उद्देश्य से 9वां राष्ट्रीय पोषण माह 9 सितंबर 2026 से शुरू होगा। इस वर्ष अभियान की थीम “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी” रखी गई है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि विकसित भारत की नींव आज के बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा से मजबूत होगी और इसमें आंगनवाड़ी केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
नई दिल्ली: देशभर में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के पोषण एवं शुरुआती विकास को मजबूत करने के उद्देश्य से 9वां राष्ट्रीय पोषण माह 9 सितंबर 2026 से शुरू होगा। इस वर्ष अभियान की थीम “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी” रखी गई है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि विकसित भारत की नींव आज के बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा से मजबूत होगी और इसमें आंगनवाड़ी केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मंत्री ने कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती पहले एक हजार दिन उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों का वजन और लंबाई मापने, पोषण संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने, गरम पका भोजन देने और शुरुआती शिक्षा एवं विकास में मदद करने का काम किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं को भी आंगनवाड़ी के माध्यम से पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी जरूरी सलाह मिलती है।
देशभर में करीब 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्र 8.9 करोड़ से अधिक बच्चों, महिलाओं और किशोरियों तक सेवाएं पहुंचा रहे हैं। इन केंद्रों को संचालित करने वाली करीब 25.2 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं स्थानीय समुदाय से जुड़ी हुई हैं।
लाभार्थी नहीं, भागीदार बनेगा समुदाय
इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह में केवल सरकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाने के बजाय सामुदायिक भागीदारी को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों में माता-पिता, पंचायत प्रतिनिधियों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।
समुदाय यह देख सकेगा कि आंगनवाड़ी में बच्चों को निर्धारित सेवाएं मिल रही हैं या नहीं, भोजन की गुणवत्ता कैसी है और केंद्र को बेहतर बनाने के लिए किस तरह के सहयोग की आवश्यकता है। इसके साथ ही सोशल ऑडिट के माध्यम से आंगनवाड़ी सेवाओं की समीक्षा और सुधार की प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा।
हर आंगनवाड़ी में लगेगा मेन्यू बोर्ड
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए हर आंगनवाड़ी केंद्र में मेन्यू बोर्ड लगाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसमें बच्चों और लाभार्थियों को दिए जाने वाले गरम पके भोजन और टेक-होम राशन की दिनवार जानकारी उपलब्ध रहेगी।
माता-पिता मेन्यू बोर्ड के माध्यम से यह जान सकेंगे कि उनके बच्चों को किस दिन क्या भोजन मिलना है। इससे भोजन की मात्रा और गुणवत्ता को लेकर समुदाय की निगरानी भी मजबूत होगी।
पोषण के साथ शुरुआती शिक्षा पर भी फोकस
राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान बच्चों के पोषण के साथ-साथ उनके शुरुआती विकास और सीखने पर भी ध्यान दिया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों के विकास के विभिन्न पड़ावों की निगरानी की जाती है। नवचेतना और आधारशिला जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को स्कूल जाने से पहले सीखने के लिए तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
बच्चों के लिए संतुलित और विविधतापूर्ण भोजन में अनाज, श्री अन्न, दालें, मेवे एवं बीज, दूध और दुग्ध उत्पाद, अंडे, मौसमी फल और हरी सब्जियों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।
मातृ पोषण पर भी विशेष ध्यान
बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य की शुरुआत जन्म से पहले ही हो जाती है। गर्भावस्था के दौरान मां का पोषण सीधे तौर पर बच्चे के स्वास्थ्य और विकास को प्रभावित करता है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
मंत्रालय के अनुसार, योजना के तहत अब तक 4.65 करोड़ लाभार्थियों को करीब ₹21,511 करोड़ की राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है। मिशन शक्ति के तहत दूसरी संतान के रूप में बेटी के जन्म पर भी अतिरिक्त लाभ का प्रावधान किया गया है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सम्मान पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस पूरे अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। सामुदायिक भागीदारी का उद्देश्य उनके काम का बोझ बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें सहयोग और सम्मान देना है।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि सितंबर माह में अपने क्षेत्र की कम से कम एक आंगनवाड़ी का दौरा करें, कार्यकर्ता से बातचीत करें, मेन्यू बोर्ड देखें और बच्चों को मिल रही सेवाओं की जानकारी लें। साथ ही यह भी समझें कि समुदाय की ओर से आंगनवाड़ी को किस तरह सहयोग दिया जा सकता है।
मंत्री ने कहा कि आज जिन बच्चों का पोषण और शुरुआती विकास आंगनवाड़ी केंद्रों में हो रहा है, वे वर्ष 2047 में देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसलिए आंगनवाड़ी को केवल सरकारी केंद्र नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की साझा जिम्मेदारी बनाना जरूरी है।
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