CDSCO की जांच में 199 दवाएं फेल, कई में बेहद कम मिली सक्रिय सामग्री; एक नमूना नकली घोषित
नई दिल्ली: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की जांच में देशभर की 199 दवा के नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच में कुछ दवाओं में सक्रिय औषधीय सामग्री निर्धारित मात्रा से काफी कम मिली, जबकि एक नमूने को नकली घोषित किया गया।
सबसे गंभीर मामला क्लोपिडोग्रेल और एस्पिरिन की संयुक्त दवा का सामने आया। हिमाचल प्रदेश की फार्मारूट्स हेल्थकेयर के एक नमूने में क्लोपिडोग्रेल की मात्रा महज 38.20% और एस्पिरिन 21.8% पाई गई। दवा के घुलने और फ्री सैलिसिलिक एसिड से जुड़ी खामियां भी जांच में सामने आईं।
इसी तरह समय फार्मा इंडिया की आर-जारा DSR कैप्सूल में रैबेप्राजोल और डोमपेरीडोन की मात्रा जांच में 0.0 मिलीग्राम मिली, जबकि पैकेज पर दोनों की मौजूदगी का दावा किया गया था। वहीं, डिवाइन मेडिकेयर की 300 mg प्रेगाबालिन कैप्सूल में केवल 211.16 mg सक्रिय दवा मिली।
जांच में पेट की समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ पैंटोप्राजोल और ओमेप्राजोल दवाएं भी घुलने की गुणवत्ता जांच में विफल रहीं। कई अन्य नमूनों में सक्रिय पदार्थ की मात्रा, पहचान और हर टैबलेट में समान मात्रा से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में केवल छोटी कंपनियों के उत्पाद ही शामिल नहीं हैं। लुपिन, सनोफी इंडिया, जायडस हेल्थकेयर, आईपीका लेबोरेटरीज, मैक्लियोड्स फार्मास्यूटिकल्स, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मास्यूटिकल्स और कैडिला फार्मास्यूटिकल्स के कुछ उत्पाद भी अलग-अलग जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे।
इसके अलावा डायबिटिस-ऑल पाउडर के एक नमूने में पियोग्लिटाजोन की मौजूदगी पाई गई, जो उत्पाद के घोषित दावे से मेल नहीं खाती थी। इसे जांच में नकली नमूना घोषित किया गया। मामले ने दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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