बिहार सरकार पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री व्यवस्था एवं बेतहासा, अव्यवहारिक पेपर लेस व्यवस्था को वापस लेने की मांग
गया । बिहार सरकार द्वारा राज्य में जमीन रजिस्ट्री सिस्टम को 17 अगस्त 2026 से पेपरलेस व्यवस्था एवं बेतहासा शुल्क वृद्धि लागू करने से सूबे के सभी रजिस्ट्री ऑफिस पूरी तरह सुना पड़ा हुआ है, सभी डीड राइटर, मुंशी अपने रोजगार समाप्त होने के खिलाफ रजिस्ट्री ऑफिस पर इस पद्धति को समाप्त कराने हेतु अनिश्चित कालीन धरना पर बैठे हैं,तो दुसरी ओर शुल्क वृद्धि से परेशान ग्रामीण किसान मजदूर जो अभी भी डिजिटल हस्ताक्षर, ओपीटी से अनभिज्ञ हैं, वो अपने जमीन बेचने, खरीदने हेतु उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
विगत कई दिनों से सूबे के विभिन्न रजिस्ट्री ऑफिस में पेपर लेस रजिस्ट्री व्यवस्था को वापस कराने एवं शुल्क वृद्धि वापस लेने की मांग को लेकर डीड राइटर मुंशी के चल रहे शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन का कॉंग्रेस पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं ने समर्थन कर राज्य सरकार से इस अव्यावहारिक और तकनीकी पद्धति को वापस लेने का मांग राज्य सरकार से किया है। पेपर लेस रजिस्ट्री व्यवस्था से हज़ारों लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है, रजिस्ट्री शुल्क सीधे पहले से दुगना होने से किसान, मजदूर, एवं आमजनों को रजिस्ट्री शुल्क देने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को तकनीकी जानकारी के आभाव में आम लोगों के लिए पेपरलेस डिजिटल व्यवस्था भारी परेशानी बनी हुई हैं जबकि सैकड़ों करोड़ राजस्व का नुकसान राज्य सरकार को हुआ । सरकार से जनहित में शुल्क वृद्धि और अव्यवहारिक पेपर लेस व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है।