अनंत सिंह की विधायकी पर संकट गहराया, उमेश कुशवाहा ने स्पीकर को सौंपा 10 पन्नों का अनुशंसा पत्र
पटना: बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह को लेकर हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) से निष्कासित अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त कराने की मांग उठी है। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने सोमवार को बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से मुलाकात कर इस संबंध में 10 पन्नों का अनुशंसा पत्र सौंपा। बताया जा रहा है कि पत्र के साथ कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों से जुड़े वीडियो भी दिए गए हैं। अब इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।
पटना: बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह को लेकर हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) से निष्कासित अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त कराने की मांग उठी है। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने सोमवार को बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से मुलाकात कर इस संबंध में 10 पन्नों का अनुशंसा पत्र सौंपा। बताया जा रहा है कि पत्र के साथ कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों से जुड़े वीडियो भी दिए गए हैं। अब इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।
अनंत सिंह पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप
जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने आरोप लगाया कि अनंत सिंह ने पार्टी के खिलाफ कई गतिविधियां की हैं। उन्होंने दावा किया कि इन आरोपों के समर्थन में पार्टी के पास ठोस सबूत हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर विधानसभा अध्यक्ष को अनुशंसा पत्र सौंपा गया है।
पार्टी की ओर से अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त कराने की मांग की गई है। हालांकि, इस मामले में अभी तक विधानसभा अध्यक्ष की ओर से अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
एमएलसी चुनाव के दौरान बढ़ा विवाद
अनंत सिंह के खिलाफ जेडीयू की कार्रवाई की प्रमुख वजह बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान सामने आया विवाद बताया जा रहा है। आरोप है कि अनंत सिंह ने जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार किया और जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया था।
जेडीयू नेतृत्व ने इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ गतिविधि माना। इसके अलावा, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है।
अनंत सिंह और नीलम देवी को छह साल के लिए किया गया निष्कासित
इस विवाद के बाद जेडीयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी एवं पूर्व विधायक नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी ने दोनों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया।
अब पार्टी ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त कराने के लिए भी कदम उठाया है। इससे बिहार की राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग
जेडीयू की ओर से अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त कराने के लिए संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला दिया गया है। यह अनुसूची दल-बदल के आधार पर सांसदों और विधायकों की अयोग्यता से संबंधित प्रावधान निर्धारित करती है।
ऐसे मामलों में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। अब सौंपे गए अनुशंसा पत्र और उपलब्ध कराए गए कथित साक्ष्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया क्या होगी, यह विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर करेगा।
क्या अनंत सिंह की विधायकी चली जाएगी?
फिलहाल अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। जेडीयू ने सदस्यता समाप्त कराने की मांग करते हुए अपनी अनुशंसा विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मामले में संवैधानिक प्रावधानों के तहत क्या कार्रवाई होती है।
बिहार की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पार्टी से निष्कासन के बाद अनंत सिंह की विधायकी पर भी संकट गहराएगा या उन्हें विधानसभा सदस्य के रूप में बने रहने का मौका मिलेगा?
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