बैद्यनाथ धाम की कांवड़ यात्रा भक्ति और समर्पण का अद्वितीय संगम
(30 जुलाई, बाबा बैद्यनाथ धाम यात्रा, सावन मेला के प्रारंभ पर विशेष)
झारखंड प्रांत के देवघर जिले में स्थापित बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा 30 जुलाई से प्रारंभ हो रही है । सावन मास के प्रारंभ होते ही यह यात्रा प्रारंभ हो जाती है। इस यात्रा में भारतवर्ष के विभिन्न प्रांतों के शिवभक्त शामिल होते हैं । ये शिवभक्त सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर अस्सी किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ के शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। हमारे धर्म शास्त्रों में वर्णन है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस बार यह कांवर यात्रा सोमवार के दिन से प्रारंभ हो रही है, यह शिव भक्तों के लिए बहुत ही शुभ है । हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना का विशिष्ट दिन होता है। इस दिन शिव मंदिरों में शिव भक्तों की काफी भीड़ देखी जाती है। सावन मास के हर सोमवार के दिन भगवान शिव की फूलों से विशेष सज्जा कर आराधना की जाती है। साथ ही शिव मंदिरों को सजाया भी जाता है। सोमवार के दिन कई भक्त दिन भर उपवास कर संध्या में भगवान शिव की आराधना के पश्चात सिर्फ फल ही ग्रहण करते हैं। एक ऐसी मान्यता है कि सिर्फ सोमवार को भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को पूरे एक सप्ताह के पूजा का फल प्राप्त होता है।
हर साल इस यात्रा में लाखों शिव भक्त शामिल होते हैं। इस वर्ष उम्मीद है कि गत वर्ष की तुलना में अधिक शिवभक्त शामिल होंगे। चूंकि गत वर्ष मलमास के कारण कई नए कांवरिया कांवर लेकर इस यात्रा में सम्मिलित नहीं हो पाए थे। वे इस बार इस कांवर यात्रा में जरूर शामिल होंगे । ऐसे भी सालों भर देवघर स्थित वैद्यधाम के दर्शन करने के लिए लाखों शिव भक्त पहुंचते रहते हैं । लेकिन सावन मास की बात ही निराली होती है। सुल्तानगंज से शुरू होने वाली यात्रा, शिवभक्तों के नाच गान और उल्लास देखते बनता है ।
शिव भक्तों के बोल बम के नारों से सुल्तानगंज से लेकर बाबा बैजनाथ धाम तक का संपूर्ण क्षेत्र गूंज उठता है। केसरिया वस्त्र में हर एक भोले बाबा के भक्त नजर आते हैं। सभी भक्त ऊंच-नीच, अमीर गरीब का भेद मिटाते हुए बोल बम के नारों के साथ बाबा बैजनाथ धाम की यात्रा पूरी करते हैं । यह यात्रा समस्त देशवासियों को एक होने की सीख भी प्रदान करती है । बाबा भोलेनाथ ऐसे देव हैं, इनकी कृपा सदा अपने भक्तों पर बरसती रहती है। देवों के देव महादेव समस्त भक्तों के सभी कष्टों को दूर भी करते हैं। इस यात्रा में कई शिवभक्त पिछले 30 - 40 वर्षों से लगातार शामिल होते चले आ रहें हैं। इस यात्रा में कई ऐसे भक्त भी शामिल होते हैं, जो 7 - 8 वर्ष की उम्र में इस यात्रा में शामिल हुए थे, वे आज भी वृद्धावस्था प्राप्त कर इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं। इस यात्रा की सबसे सुखद पहलू यह है कि शिवभक्त जब तक इस यात्रा में चलते रहते हैं घर - द्वार, लोक संसार की चिंताओं से पूरी तरह मुक्त होते हैं। शिव भक्तों का ध्यान बस एक ही जगह केंद्रित होता है, कि सुल्तानगंज से लिया गया यह पवित्र गंगाजल कैसे बाबा भोलेनाथ के शिवलिंग पर अर्पित किया जाए।
बाबा बैद्यनाथ प्रसिद्ध तीर्थस्थलों और बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है। इसे भगवान शिव का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है । ये एक ज्योतिर्लिंग है, जो शक्तिपीठ भी है। मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वंय भगवान विष्णु ने की थी। इस मंदिर में आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसलिए मंदिर में स्थापित शिवलिंग को कामना लिंग के नाम से भी जाना जाता है। बाबा बैजनाथ धाम में स्थापित शिवलिंग कामना लिंग के रूप में जाना जाने के कारण हर वर्ष कांवरियों की संख्या में वृद्धि होती रहती है। कामना लिंग के रूप में प्रतिष्ठित होने के कारण सालों भर शिव भक्तों की भारी भीड़ बाबा बैजनाथ धाम के दर्शन हेतु आते रहते हैं । कई भक्त ऐसे भी नजर आते हैं , जिनकी संख्या लाखों में है। भगवान शिव ने उन्हें पुत्र व पुत्री से नवाजा। ऐसे याचक भक्त अपने बच्चों का मुंडन बाबा बैजनाथ धाम की पवित्र धरती पर करवाते देखे जाते हैं।
हमारे हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार बाबा बैद्यनाथ धाम के संदर्भ में मान्यता है कि बैजनाथ धाम की यात्रा कर शिवलिंग पर जल अर्पित करने से मनुष्य के सभी पाप कट जाते हैं।। शिव पुराण में वर्णन है कि घर संसार में जो पाप होते हैं, चारों धाम की यात्रा करने से कट जाते हैं । इन चारों धामों में जो पाप होते हैं, गंगा स्नान करने से पाप कट जाते हैं। गंगा स्नान में जो पाप होते हैं, बाबा बैजनाथ धाम की यात्रा से पाप कट जाते हैं । जो भक्त इस पवित्र भूमि अर्थात बाबा बैजनाथ धाम में पाप करते हैं, उनका पाप बज्रलेप हो जाता है। अर्थात बैजनाथ धाम में किए पाप का फल भोगना ही पड़ेगा। इसलिए इस यात्रा में शामिल सभी भक्तों को यह सावधानी बरतने की जरूरत है कि मन से अथवा कर्म से कोई ऐसा कार्य ना करें, जिससे वे पाप के भागी बनेंगे।
देवघर स्थित बाबा बैजनाथ धाम में स्थापित शिवलिंग के संदर्भ में शिव पुराण में वर्णन है यह शिव लिंग रावण की भक्ति का प्रतीक है। इस जगह को लोग बाबा बैजनाथ धाम के नाम से भी जानते हैं। सावन में इस जगह का खास महत्व होता है। पूरे एक महीने तक यहां श्रावणी मेला लगता है। इस वर्ष मलमास के कारण यह मेला दो महीने तक लगातार चलता रहेगा। सावन के महीने में दूर-दूर से लोग कांवड़ लेकर बाबा के धाम पहुंचते हैं और गंगा जल चढ़ाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। विदेशों से भी कई शिवभक्त कावड़ लेकर शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं।
बाबा बैद्यनाथ धाम की कथा बड़ी निराली है। भगवान शिव के भक्त रावण और बाबा बैजनाथ की यह कहानी लोगों की जुबानी रहती है। यही इस कथा की लोकप्रियता है। पौराणिक कथा के अनुसार दशानन रावण भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए हिमालय पर तप कर रहा था । वह एक-एक करके अपने सिर काटकर शिवलिंग पर चढ़ा रहा था। नौं सिर चढ़ाने के बाद जब रावण दसवां सिर काटने वाला था तो भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिया था। भगवान शिव ने भक्त रावण की भक्ति देखकर मनचाहा वर मांगने का आदेश दिया था । भक्त रावण भगवान शिव के इस वर पर भगवान शिव को ही लंका ले जाने का वर मांग लिया था। भगवान शिव कुछ शर्तों के साथ तथास्तु कहकर शिवलिंग रूप में परिवर्तित हो गए थे। महाबली रावण उक्त शिवलिंग को हिमालय से लेकर लंका जा रहे थे। बीच में भगवान विष्णु ने ऐसा माया रचा था कि महाबली रावण को उक्त शिवलिंग को देवघर की पवित्र भूमि में रखना पड़ा था। हिमालय से लाया गया यह शिवलिंग उसी में आज भी स्थापित है। तभी से बारह शिवलिंग में सबसे प्रमुख शिवलिंग के रूप में बाबा बैजनाथ धाम में स्थापित शवलिंग को जाना जाता है।
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