मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा : मैट्रिक छात्रवृत्ति में केंद्रीय अंशदान बढ़ाने की मांग रखी
भारत सरकार एक नीतिगत निर्णय पर विचार करें जिसके अंतर्गत आर्थिक रूप से पिछड़े एवं विकासशील राज्यों को छात्रवृत्ति योजनाओं विशेष कर पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में अधिक केंद्रीय अंशदान का प्रावधान किया जाय ताकी शिक्षा में समानता और सामाजिक न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति की जा सके।
राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र कहा भारत सरकार द्वारा देश के अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन में आर्थिक सहयोग हेतु वर्ग वार प्री एवं पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। शिक्षा उन्नयन के लिए निरंतर प्रयास सराहनीय एवं अनुकरणीय हैं। आपके नेतृत्व में शिक्षा एवं समान अवसरों की दिशा में जो नीतिगत निर्णय लिए गए हैं वह समाज के कमजोर वर्गों को मुख्य धारा में लाने की दिशा में प्रभावी सिद्ध होंगे। झारखंड सरकार उक्त भावनाओं के अनुरूप सामाजिक समानता एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण के लक्ष्य को साकार करने हेतु निरंतर प्रयासरत है। राज्य में शिक्षा को प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का अभियान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में एक है।
मुख्यमंत्री ने झारखंड की स्थिति से अवगत कराटे हुए पत्र में लिखा है की - राज्य ने छात्रवृत्ति दर निर्धारण में समुदाय विशेष को आधार न मानते हुए इसे पूर्णता लाभुक के माता-पिता या आश्रित के वार्षिक आय को आधार माना है, जो पारदर्शी समान एवं सामाजिक न्याय की आधुनिक परिभाषा के अनुरूप है, फिर भी झारखंड में अन्य राज्यों की अपेक्षा भौगोलिक कठिनाइयां, सीमित संसाधनों और वंचित समुदायों की संख्या अधिक होने के कारण विद्यार्थियों को अपेक्षित सहायता प्रदान करना चुनौती पूर्ण है।
पत्र में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लिखा है कि - वित्तीय वर्ष 2025-26 में 45.91 करोड़ की अधियाचना की गई थीजिसमें केंद्र सरकार द्वारा केवल 3.95 करोड़ की राशि दी गई। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति हेतु राज्य द्वारा विगत वित्तीय वर्ष 2024-25 में याचित 353 करोड रुपए में केंद्र द्वारा मात्र 33.57 करोड रुपए विमुक्त किए गए हैं। इसी तरह कई बार केंद्र द्वारा राशि कम दिए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री से निवेदन किया है कि भारत सरकार एक नीतिगत निर्णय पर विचार करें जिसके अंतर्गत आर्थिक रूप से पिछड़े एवं विकासशील राज्यों को छात्रवृत्ति योजनाओं विशेष कर पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में अधिक केंद्रीय अंशदान का प्रावधान किया जाय ताकी शिक्षा में समानता और सामाजिक न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति की जा सके।
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