चाईबासा: जर्जर सड़क से परेशान ग्रामीणों का ऐलान, सड़क नहीं बनी तो करेंगे वोट बहिष्कार; अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के गांव में प्रवेश पर रोक
चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझारी प्रखंड अंतर्गत बिदरी टोली पताओते गांव में नाला वाली जर्जर सड़क को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे ग्रामीणों ने अब आगामी चुनाव में वोट बहिष्कार की चेतावनी दी है। ग्रामीणों ने यह भी ऐलान किया है कि सड़क की समस्या का समाधान नहीं होने तक गांव में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।
चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझारी प्रखंड अंतर्गत बिदरी टोली पताओते गांव में नाला वाली जर्जर सड़क को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे ग्रामीणों ने अब आगामी चुनाव में वोट बहिष्कार की चेतावनी दी है। ग्रामीणों ने यह भी ऐलान किया है कि सड़क की समस्या का समाधान नहीं होने तक गांव में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।
बरसात में कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
ग्रामीणों के अनुसार, गांव की नाला वाली सड़क लंबे समय से जर्जर स्थिति में है। खासकर बरसात के दिनों में सड़क पर कीचड़ भर जाने से आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है। बच्चों को प्रतिदिन इसी खराब रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्या उनके बच्चों को अच्छी सड़क और सुरक्षित रास्ते से स्कूल जाने का अधिकार नहीं है? आखिर कब तक गांव के बच्चे और आम लोग इस परेशानी को झेलते रहेंगे? ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली के कारण रोजमर्रा के आवागमन में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
कई बार आवेदन देने के बाद भी नहीं हुआ समाधान
ग्रामीणों का दावा है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष कई बार अपनी समस्या रखी गई है। इस संबंध में उपायुक्त कार्यालय में सबसे पहले 22 अगस्त 2022 को आवेदन दिया गया था। इसके बाद 12 मार्च 2024 और फिर 25 जनवरी 2025 को भी सड़क निर्माण की मांग करते हुए आवेदन सौंपा गया।
ग्रामीणों के मुताबिक, इन सभी आवेदनों की प्राप्ति रसीद उनके पास सुरक्षित है। इसके बावजूद अब तक सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि बार-बार आवेदन देने और अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होना निराशाजनक है।
ग्रामीणों ने मझगांव के विधायक निरल पूर्ति को भी सड़क की बदहाल स्थिति से अवगत कराने की बात कही है। उनका कहना है कि विधायक से मुलाकात कर सड़क निर्माण की आवश्यकता और ग्रामीणों की परेशानियों के बारे में जानकारी दी गई थी। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने से लोग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
गांव में अधिकारियों का आना-जाना, फिर भी सड़क बदहाल
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में वन विभाग का विश्रामगृह और नर्सरी भी है, जहां बैठकों और अन्य कार्यों के सिलसिले में अधिकारियों, मंत्रियों तथा विधायकों का आना-जाना होता है। इसके बावजूद गांव की सड़क की स्थिति में सुधार नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताई।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब गांव में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का आवागमन होता है, तो क्या उन्हें बच्चों और आम ग्रामीणों की परेशानियां दिखाई नहीं देतीं? उनका कहना है कि सड़क निर्माण केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और ग्रामीणों के सम्मानजनक जीवन से भी जुड़ा हुआ है।
समाजसेवी बनमाली तामसोय ने की तत्काल कार्रवाई की मांग
समाजसेवी बनमाली तामसोय ने बिदरी टोली पताओते की नाला वाली सड़क का तत्काल स्थल निरीक्षण कराने और निर्माण कार्य की स्वीकृति के साथ काम शुरू कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीण वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की कि पूर्व में दिए गए आवेदनों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसकी जांच की जाए और ग्रामीणों को लिखित रूप में स्पष्ट जानकारी दी जाए।
ग्रामीणों ने कहा- आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए
ग्रामीण जामदार तामसोय ने कहा कि अब ग्रामीणों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर सड़क का निर्माण चाहिए। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि ग्रामीणों के आवेदन को एक और कागजी औपचारिकता समझकर नजरअंदाज नहीं किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से समस्या झेलने के बाद अब उनका धैर्य जवाब देने लगा है। यदि जल्द ही सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई, तो वे आगामी चुनाव में वोट बहिष्कार के अपने फैसले पर आगे बढ़ सकते हैं।
इस दौरान गांव के विद्यार्थी, कान्डे तामसोय, प्रदीप, बालेमा सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
प्रशासन से ग्रामीणों के सवाल
बिदरी टोली पताओते के ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सवाल किया है कि आखिर उनकी समस्या का समाधान कब होगा? क्या सड़क निर्माण के लिए किसी बड़े हादसे या आंदोलन का इंतजार किया जाएगा?
ग्रामीणों की मांग है कि सड़क की वास्तविक स्थिति का आकलन कर जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू किया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित रास्ता मिल सके और ग्रामीणों को रोजाना होने वाली परेशानियों से राहत मिले।
अब देखना होगा कि वर्षों से लंबित इस सड़क की समस्या पर जिला प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधि क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें सड़क निर्माण की दिशा में होने वाली ठोस कार्रवाई पर टिकी हैं।
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