मत्स्य निदेशालय की सराहनीय पहल :  रंगीन मछली पालन और मोती उत्पादन बन रहा रोजगार का सशक्त साधन 

Jun 3, 2026 - 16:35
मत्स्य निदेशालय की सराहनीय पहल :  रंगीन मछली पालन और मोती उत्पादन बन रहा रोजगार का सशक्त साधन 

झारखंड में रंगीन मछली पालन और मोती उत्पादन रोजगार का एक सशक्त जरिया बन रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो रही है। वहीं,मत्स्य उत्पादन में झारखंड आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है।  खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन से रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। उक्त बातें झारखंड सरकार के मत्स्य निदेशालय के निदेशक अमरेंद्र कुमार ने कही।

 उन्होंने बताया कि गत वित्तीय वर्ष की तुलना में मछली उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 
चार लाख दस हजार मीट्रिक टन उत्पादन लक्ष्य के एवज में तीन लाख इक्यासी हजार छह सौ मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ। 
झारखंड में पहली बार रंगीन मछलियों के उत्पादन की  पहल की गई है। इसके तहत महिला मत्स्यजीवी सहयोग समितियां का गठन कर महिलाओं को रंगीन मछली पालन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। रंगीन मछली पालन महिलाओं के रोजगार सृजन का एक माध्यम बन रहा है। 
 फिलहाल झारखंड में मछली की खपत के अनुरूप उत्पादन होने लगा है। झारखंड अब अन्य सीमावर्ती  राज्यों (बिहार, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल) को मछली निर्यात कर रहा  है। 
 मत्स्य निदेशक ने कहा कि हम मछली उत्पादन के निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
 पिछले वित्तीय वर्ष 25-26 में  जबरदस्त सफलता मिली। लगभग चार लाख मीट्रिक टन का रिकॉर्ड उत्पादन मत्स्य किसानों ने किया। इस वर्ष  लक्ष्य को बढ़ाकर 4लाख 23 हजार मीट्रिक टन रखा गया है। लक्ष्य हासिल करने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। मत्स्य कृषकों को विभिन्न योजनाओं से आच्छादित किया जा रहा है।
निदेशक ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अभी तक जो भी कार्य हुए हैं वह संतोषप्रद रहे हैं। इसमें किसानों का भी सहयोग मिला है। उन्होंने बताया कि 4500 केज प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत किसानों को दिया गया है, वैसे पूरे राज्य में 15 हजार केज किसानों को दिए गए हैं। 

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान

 निदेशक ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की शुरुआत की गई है। इसके तहत भारत सरकार द्वारा झारखंड के 223 प्रखंड अंतर्गत 6822 ग्रामों के अनुसूचित जनजाति के कृषक, जो मछली पालन को रोजगार के रूप में अपनाना चाहते हैं, उनके लिए यह योजना वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक के लिए शुरू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के जनजातीय बहुल ग्रामों तथा आकांक्षी प्रखंडों में जनजातीय समुदायों के बीच सामाजिक आर्थिक स्थिति में सुधार करना है एवं जल कृषि के माध्यम से अनुसूचित जनजातीय मछुआरों और सामूहिक मत्स्य पालक समूह धारकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना का मुख्य उद्देश्य मछली उत्पादन एवं उत्पादकता में गुणात्मक वृद्धि, मत्स्य प्रबंधन हेतु नवीनतम तकनीकी सहायता, आवश्यक आधुनिक आधारभूत संरचना का विकास, आधुनिकीकरण एवं शुद्धीकरण हेतु सहायता उपलब्ध कराना है।

मोती पालन भी बन रहा मत्स्यपालकों के आमदनी का जरिया

निदेशक ने बताया कि   झारखंड के मत्स्य कृषकों को मोती पालन का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके तहत मत्स्य कृषक मछली उत्पादन के साथ-साथ मोती पालन के गुरु भी सीख रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक समृद्धि बढ़ रही है। केंद्र सरकार द्वारा झारखंड के हजारीबाग जिला को मोती पालन के लिए कलस्टर सेंटर चयनित किया जाना गर्व की बात है।

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