बिहार में साइबर ठगों का बढ़ता जाल: पटना में 10 गिरफ्तार, डिजिटल अरेस्ट और म्यूल अकाउंट से करोड़ों की ठगी
पटना: झारखंड के जामताड़ा के बाद बिहार में भी साइबर ठगी के नेटवर्क को लेकर चिंता बढ़ रही है। पटना और मुजफ्फरपुर में पुलिस की कार्रवाई के दौरान साइबर अपराध से जुड़े अलग-अलग गिरोहों का खुलासा हुआ है। आरोप है कि कहीं फर्जी आवासीय प्रमाण पत्रों के जरिए बैंक खाते खुलवाकर ठगी की रकम का लेन-देन किया जा रहा था, तो कहीं सीबीआई और पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया जा रहा था। इन मामलों ने साइबर अपराधियों के नए तरीकों को उजागर किया है।
पटना: झारखंड के जामताड़ा के बाद बिहार में भी साइबर ठगी के नेटवर्क को लेकर चिंता बढ़ रही है। पटना और मुजफ्फरपुर में पुलिस की कार्रवाई के दौरान साइबर अपराध से जुड़े अलग-अलग गिरोहों का खुलासा हुआ है। आरोप है कि कहीं फर्जी आवासीय प्रमाण पत्रों के जरिए बैंक खाते खुलवाकर ठगी की रकम का लेन-देन किया जा रहा था, तो कहीं सीबीआई और पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया जा रहा था। इन मामलों ने साइबर अपराधियों के नए तरीकों को उजागर किया है।
पटना में छापेमारी, अंतरराज्यीय गिरोह के 10 सदस्य गिरफ्तार
पटना साइबर पुलिस ने अगमकुआं थाना क्षेत्र के शीतलानगर नहर रोड स्थित एक मकान में छापेमारी कर कथित अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी फर्जी आवासीय प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर लोगों के आधार कार्ड पर पता बदलवाते थे। इसके बाद इन दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे।
जांच के मुताबिक, इन बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेन-देन के लिए किया जाता था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज और बैंक पासबुक बरामद किए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के तार किन अन्य राज्यों और साइबर अपराधियों से जुड़े हैं।
मुजफ्फरपुर में डिजिटल अरेस्ट गिरोह का खुलासा
मुजफ्फरपुर में भी साइबर पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य खुद को सीबीआई या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे और उन्हें गंभीर आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देते थे।
इसके बाद जांच और गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता था। इस मामले में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से टीपू कुशवाहा की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की रकम के लेन-देन की जांच कर रही है।
म्यूल अकाउंट से करीब 2.5 करोड़ रुपये की हेराफेरी
साइबर अपराध में म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल भी जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त धन को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारकों को कमीशन या पैसों का लालच देकर उनके खाते इस्तेमाल किए जाते हैं।
पटना में तीन युवकों की गिरफ्तारी के मामले में आरोप है कि वे लोगों को पैसे का लालच देकर नए बैंक खाते खुलवाते थे या उनके मौजूदा खाते किराये पर लेते थे। इन खातों के माध्यम से करीब 2.5 करोड़ रुपये की हेराफेरी किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस इस रकम के स्रोत, लेन-देन और संभावित लाभार्थियों की जांच कर रही है।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कस्टम्स या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे पीड़ित को वीडियो कॉल पर रहने, किसी से संपर्क नहीं करने और कथित जांच पूरी होने तक निगरानी में रहने के लिए कहते हैं।
कई बार ठग फर्जी पहचान पत्र, नकली दस्तावेज और गिरफ्तारी वारंट दिखाकर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। इसके बाद बैंक खाते की जांच, कानूनी कार्रवाई से बचाने या रकम के सत्यापन के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है।
ध्यान रखें: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। ऐसे कॉल आने पर घबराने के बजाय संबंधित एजेंसी के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करें।
साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?
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किसी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड या बैंक खाते की गोपनीय जानकारी न दें।
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वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति के दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें।
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अपना बैंक खाता, पासबुक, एटीएम कार्ड या खाते से जुड़ी जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें।
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किसी भी संदिग्ध दस्तावेज, गिरफ्तारी वारंट या सरकारी पहचान पत्र की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।
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यदि कोई आपके खाते में संदिग्ध रकम आने या उसे आगे ट्रांसफर करने को कहता है, तो ऐसा करने से बचें और बैंक को सूचित करें।
यदि आपके साथ साइबर ठगी हो जाती है, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
पुलिस की कार्रवाई से सामने आई चुनौती
पटना और मुजफ्फरपुर में हुई कार्रवाइयां बताती हैं कि साइबर अपराधी लोगों को डराने के साथ-साथ बैंक खातों और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में अपराधियों के साथ-साथ उनके लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की पहचान करना भी जरूरी है।
फिलहाल, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और संबंधित मामलों की जांच के जरिए गिरोह के नेटवर्क, ठगी की रकम और अन्य संभावित आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इन मामलों से जुड़े सभी तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
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