जमशेदपुर जू में बाघिन सुनैना ने दिया तीन शावकों को जन्म, नामकरण के लिए 19 अक्टूबर तक भेजें सुझाव
जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी सामने आई है। चिड़ियाघर में बाघिन सुनैना ने तीन नन्हें बाघ शावकों को जन्म दिया है। इनमें दो मादा और एक नर शावक शामिल हैं। इन नन्हें मेहमानों के आने से चिड़ियाघर प्रबंधन और वन्यजीव प्रेमियों में खुशी का माहौल है। अब इन शावकों को नाम देने का मौका आम नागरिकों को भी मिलने जा रहा है। टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क प्रबंधन ने तीनों शावकों के नामकरण के लिए लोगों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इच्छुक नागरिक 19 अक्टूबर तक अपने सुझाव भेज सकते हैं। चयनित नामों के सुझाव देने वाले विजेताओं को सम्मानित भी किया जाएगा।
जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी सामने आई है। चिड़ियाघर में बाघिन सुनैना ने तीन नन्हें बाघ शावकों को जन्म दिया है। इनमें दो मादा और एक नर शावक शामिल हैं। इन नन्हें मेहमानों के आने से चिड़ियाघर प्रबंधन और वन्यजीव प्रेमियों में खुशी का माहौल है। अब इन शावकों को नाम देने का मौका आम नागरिकों को भी मिलने जा रहा है। टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क प्रबंधन ने तीनों शावकों के नामकरण के लिए लोगों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इच्छुक नागरिक 19 अक्टूबर तक अपने सुझाव भेज सकते हैं। चयनित नामों के सुझाव देने वाले विजेताओं को सम्मानित भी किया जाएगा।
23 सितंबर की सुबह बाघिन सुनैना ने दिया तीन शावकों को जन्म
टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में 23 सितंबर की सुबह बाघिन सुनैना ने तीन शावकों को जन्म दिया था। इनमें दो मादा और एक नर शावक शामिल हैं। इन शावकों के पिता का नाम रुद्र है, जिन्हें महाराष्ट्र के नागपुर स्थित गोरेवाड़ा रेस्क्यू सेंटर से टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क लाया गया था।
शावकों के जन्म के बाद चिड़ियाघर की पशु चिकित्सा टीम ने उनकी सेहत पर विशेष निगरानी रखी। प्रबंधन की ओर से शुरुआती स्वास्थ्य जांच और देखभाल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस खुशखबरी को सार्वजनिक किया गया। फिलहाल तीनों शावकों की नियमित निगरानी की जा रही है।
पहली बार मां बनी सुनैना, एक शावक को लगी थी चोट
तीनों शावकों के जन्म के बाद शुरुआती देखभाल के दौरान एक मादा शावक को हल्की चोट लग गई थी। बताया गया कि पहली बार मां बनी बाघिन सुनैना से अनजाने में यह चोट लगी। इसके बाद चिड़ियाघर की पशु चिकित्सा टीम ने तत्काल उपचार करते हुए शावक के घाव की सिलाई की।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उपचार के बाद शावक की स्थिति में सुधार हो रहा है। उसका वजन करीब 1.8 किलोग्राम बताया गया है। हालांकि, एहतियात के तौर पर उसे अभी भी पशु चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। वहीं, अन्य दोनों शावकों की सेहत भी लगातार देखी जा रही है।
जानिए तीनों शावकों का कितना है वजन
चिड़ियाघर प्रबंधन की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, तीनों शावकों के वजन में अंतर है। घायल हुई मादा शावक का वजन लगभग 1.8 किलोग्राम है। दूसरी मादा शावक का वजन करीब 2.53 किलोग्राम और नर शावक का वजन लगभग 2.9 किलोग्राम बताया गया है।
तीनों शावकों की देखभाल के लिए पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम तैनात है। उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए चिड़ियाघर के सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम की भी मदद ली जा रही है। प्रबंधन का ध्यान शावकों के बेहतर स्वास्थ्य, सुरक्षित वातावरण और नियमित देखभाल पर है।
अब जनता रखेगी तीनों नन्हें शावकों के नाम
टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क ने शावकों के नामकरण को खास बनाने के लिए आम नागरिकों को इस प्रक्रिया में शामिल करने का फैसला किया है। इसके तहत लोग अपने पसंदीदा नाम सुझा सकते हैं। चिड़ियाघर प्रबंधन का मानना है कि इस पहल से लोगों को वन्यजीवों से जुड़ने और संरक्षण के प्रति जागरूक होने का अवसर मिलेगा।
नाम भेजने के लिए नागरिकों को प्रत्येक शावक के लिए एक नाम सुझाना होगा। यानी एक व्यक्ति कुल तीन नाम भेज सकता है। प्राप्त सुझावों में से तीन नामों का चयन चिड़ियाघर की ओर से गठित एक पैनल करेगा।
19 अक्टूबर तक इस नंबर पर भेजें नाम
अगर आप भी बाघिन सुनैना के तीनों शावकों के नाम सुझाना चाहते हैं, तो व्हाट्सऐप या संदेश के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं।
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नाम भेजने का मोबाइल नंबर: +91 9438291637
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अंतिम तिथि: 19 अक्टूबर 2026
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कुल सुझाव: प्रत्येक शावक के लिए एक, यानी तीन नाम
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नामों का चयन: चिड़ियाघर प्रबंधन की ओर से गठित पैनल
चयनित विजेताओं को मानद प्रवेश पास और एक स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया जाएगा। हालांकि, नामों के चयन से जुड़ी विस्तृत शर्तों के लिए चिड़ियाघर प्रबंधन की आधिकारिक सूचना देखना उचित होगा।
वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल
टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क की यह पहल केवल शावकों के नामकरण तक सीमित नहीं है। इसके जरिए आम लोगों को वन्यजीव संरक्षण के महत्व से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जब नागरिक इस तरह की गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं, तो उन्हें वन्यजीवों के जीवन, उनकी देखभाल और संरक्षण की जरूरतों को करीब से समझने का अवसर मिलता है।
जमशेदपुर के नागरिकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह एक खास मौका है, जिसमें वे तीनों नन्हें बाघ शावकों के नाम सुझाकर चिड़ियाघर की इस खुशी का हिस्सा बन सकते हैं। अब देखना होगा कि लोगों की ओर से किस तरह के नाम सामने आते हैं और पैनल किन तीन नामों पर अपनी मुहर लगाता है।
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