झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला: स्पेशल ब्रांच के 174 दारोगाओं को नहीं मिलेगा सामान्य कैडर, गृह विभाग में अपील का मौका

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने स्पेशल ब्रांच में नियुक्त दारोगाओं को सामान्य पुलिस कैडर में शामिल करने की मांग खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिला पुलिस और स्पेशल ब्रांच के लिए एक ही प्रतियोगी परीक्षा आयोजित होने से दोनों का कैडर एक नहीं हो जाता। हालांकि, भर्ती विज्ञापन में स्पेशल ब्रांच के पदों को बंद कैडर (क्लोज्ड कैडर) बताने की जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं देना विभागीय चूक माना गया है। अदालत ने संबंधित 174 अभ्यर्थियों को गृह विभाग के सक्षम प्राधिकार के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।

Oct 14, 2026 - 10:36
झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला: स्पेशल ब्रांच के 174 दारोगाओं को नहीं मिलेगा सामान्य कैडर, गृह विभाग में अपील का मौका

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने स्पेशल ब्रांच में नियुक्त दारोगाओं को सामान्य पुलिस कैडर में शामिल करने की मांग खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिला पुलिस और स्पेशल ब्रांच के लिए एक ही प्रतियोगी परीक्षा आयोजित होने से दोनों का कैडर एक नहीं हो जाता। हालांकि, भर्ती विज्ञापन में स्पेशल ब्रांच के पदों को बंद कैडर (क्लोज्ड कैडर) बताने की जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं देना विभागीय चूक माना गया है। अदालत ने संबंधित 174 अभ्यर्थियों को गृह विभाग के सक्षम प्राधिकार के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।

2017 की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है मामला

यह मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त पुलिस अवर निरीक्षक प्रतियोगिता परीक्षा-2017 से संबंधित है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत जिला पुलिस और स्पेशल ब्रांच में दारोगा के पदों पर नियुक्ति की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था और अपनी प्राथमिकता में स्पेशल ब्रांच को चुना था। चयन के बाद वर्ष 2018 में उनकी नियुक्ति स्पेशल ब्रांच में दारोगा के पद पर हुई।

बाद में अभ्यर्थियों ने स्पेशल ब्रांच के अलग कैडर में नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि भर्ती विज्ञापन में स्पेशल ब्रांच के पदों को क्लोज्ड कैडर होने की जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई थी। नियुक्ति के बाद इस व्यवस्था की जानकारी मिलने से उन्हें अपनी सेवा संबंधी संभावनाओं, स्थानांतरण और पदोन्नति को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ा।

इसी आधार पर अभ्यर्थियों ने उन्हें सामान्य पुलिस कैडर में शामिल करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

एक ही परीक्षा से कैडर एक नहीं हो जाता: अदालत

न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से चयन होने का अर्थ यह नहीं है कि अलग-अलग शाखाओं के पदों का कैडर भी एक हो जाएगा। स्पेशल ब्रांच की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियां सामान्य जिला पुलिस से अलग हैं। इस शाखा में विशेष कार्यों के लिए प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मियों की उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से अलग कैडर की व्यवस्था की गई है।

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि स्पेशल ब्रांच का अलग क्लोज्ड कैडर वर्ष 2009 के सरकारी संकल्प के तहत गठित किया गया था। सरकार का पक्ष था कि केवल एक ही प्रतियोगी परीक्षा आयोजित किए जाने के आधार पर इस व्यवस्था को समाप्त नहीं किया जा सकता।

अदालत ने स्पेशल ब्रांच के पदों को सामान्य पुलिस कैडर में बदलने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। इस तरह सामान्य कैडर में शामिल किए जाने की मुख्य मांग स्वीकार नहीं की गई।

भर्ती विज्ञापन में जानकारी नहीं देना विभागीय चूक

हाईकोर्ट ने भर्ती विज्ञापन में पदों के क्लोज्ड कैडर होने की स्पष्ट जानकारी नहीं दिए जाने को विभागीय चूक माना। भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों को पद, कैडर और उससे जुड़ी सेवा शर्तों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि वे आवेदन करते समय पूरी जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विज्ञापन में हुई इस चूक के आधार पर स्पेशल ब्रांच के दारोगाओं को सामान्य पुलिस कैडर में शामिल करने का आदेश नहीं दिया जा सकता।

174 अभ्यर्थियों को मिला अभ्यावेदन देने का अवसर

अदालत ने संबंधित 174 अभ्यर्थियों की याचिकाओं का निष्पादन करते हुए उन्हें गृह विभाग के सक्षम प्राधिकार के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन देने की छूट दी है।

निर्देश के अनुसार, अभ्यर्थी हाईकोर्ट के आदेश के अपलोड होने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके बाद सक्षम प्राधिकार को अभ्यावेदन प्राप्त होने के 12 सप्ताह के भीतर नियमानुसार कारणयुक्त आदेश पारित करना होगा।

इससे अभ्यर्थियों को अपनी शिकायतें और पक्ष विभाग के समक्ष रखने का अवसर मिलेगा। हालांकि, सामान्य पुलिस कैडर में शामिल किए जाने की मांग पर उन्हें राहत मिलेगी या नहीं, यह सक्षम प्राधिकार के निर्णय और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

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