वैशाली के राघोपुर में बड़ा नाव हादसा, 13 बच्चों की मौत का दावा; एक ही परिवार के 7 बच्चे शामिल
वैशाली: बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड में रामपुर श्यामचंद गांव के पास नाव हादसे को लेकर बेहद दुखद खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार, नाव फटने की घटना में 13 बच्चों की मौत होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि सभी बच्चे एक ही गांव के रहने वाले थे और नाव से भोज खाने जा रहे थे। इस घटना में एक ही परिवार के सात बच्चों की मौत होने का दावा किया गया है। हालांकि, मृतकों की संख्या और पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
वैशाली: बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड में रामपुर श्यामचंद गांव के पास नाव हादसे को लेकर बेहद दुखद खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार, नाव फटने की घटना में 13 बच्चों की मौत होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि सभी बच्चे एक ही गांव के रहने वाले थे और नाव से भोज खाने जा रहे थे। इस घटना में एक ही परिवार के सात बच्चों की मौत होने का दावा किया गया है। हालांकि, मृतकों की संख्या और पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
एक ही परिवार के सात बच्चों की मौत का दावा
जानकारी के अनुसार, रामपुर श्यामचंद गांव के रामप्रवेश राय उर्फ राजा के परिवार के सात बच्चे इस हादसे की चपेट में आए हैं। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। बच्चों की मौत की खबर से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल बताया जा रहा है।
जर्जर नाव को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे में इस्तेमाल की गई नाव पुरानी और जर्जर थी। उनका दावा है कि नाव बदलने के लिए संबंधित अधिकारियों को कई बार आवेदन दिया गया था, लेकिन इस दिशा में कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने इसी कथित लापरवाही को हादसे की वजह बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों ने राघोपुर के अंचल अधिकारी (सीओ) के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की भी मांग उठाई है। हालांकि, हादसे के कारणों और किसी अधिकारी की जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
डीएम के पहुंचने पर ग्रामीणों का विरोध
घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी (डीएम), पुलिस अधीक्षक (एसपी) और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। लेकिन ग्रामीणों में घटना को लेकर काफी आक्रोश था। लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और डीएम का विरोध किया। हालात को देखते हुए डीएम को वापस लौटना पड़ा।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि अस्पताल में केवल एक डॉक्टर मौजूद थे और एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा ऑक्सीजन सिलेंडर और वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं की कमी का भी दावा किया गया है।
शव उठाने से इनकार, कार्रवाई की मांग
मिली जानकारी के अनुसार, हादसे के बाद शव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रखे गए हैं। आक्रोशित ग्रामीण शव उठाने देने से इनकार कर रहे हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल घटना के बाद इलाके में तनाव और शोक का माहौल है। हादसे की वास्तविक परिस्थितियों, मृतकों की संख्या और कथित लापरवाही की पुष्टि संबंधित प्रशासनिक जांच और आधिकारिक बयान के आधार पर की जानी चाहिए।
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