बिहार में स्टाफ नर्स भर्ती पर पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 13 जून 2025 तक के आरक्षण प्रमाण-पत्र होंगे मान्य
पटना: बिहार में स्टाफ नर्स भर्ती की तैयारी कर रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए राहत भरी खबर है। पटना हाईकोर्ट ने बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) को निर्देश दिया है कि स्टाफ नर्स भर्ती प्रक्रिया में 13 जून 2025 तक जारी जाति, नॉन-क्रीमी लेयर (NCLC) और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग से संबंधित प्रमाण-पत्रों को मान्य माना जाए। अदालत के इस आदेश से प्रभावित अभ्यर्थियों को उनकी संबंधित आरक्षित श्रेणी में लाभ मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।
पटना: बिहार में स्टाफ नर्स भर्ती की तैयारी कर रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए राहत भरी खबर है। पटना हाईकोर्ट ने बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) को निर्देश दिया है कि स्टाफ नर्स भर्ती प्रक्रिया में 13 जून 2025 तक जारी जाति, नॉन-क्रीमी लेयर (NCLC) और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग से संबंधित प्रमाण-पत्रों को मान्य माना जाए। अदालत के इस आदेश से प्रभावित अभ्यर्थियों को उनकी संबंधित आरक्षित श्रेणी में लाभ मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।
न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की एकलपीठ ने शाहिद अख्तर समेत 11 अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने आयोग से निर्धारित तिथि तक प्रमाण-पत्र जमा करने वाले अभ्यर्थियों को संबंधित आरक्षित श्रेणी में रखते हुए परिणाम प्रकाशित करने को कहा है।
11,389 पदों पर होनी है भर्ती
बिहार स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ नर्स के 11,389 पदों पर नियुक्ति के लिए BTSC ने विज्ञापन संख्या 23/2025 जारी किया था। आवेदन की अंतिम तिथि पहले 23 मई 2025 निर्धारित की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 13 जून 2025 कर दिया गया।
भर्ती प्रक्रिया के दौरान आरक्षण प्रमाण-पत्रों की वैधता को लेकर विवाद सामने आया। कुछ अभ्यर्थियों का कहना था कि उनके प्रमाण-पत्र निर्धारित आवेदन अवधि के भीतर जारी हुए थे, इसके बावजूद उन्हें आरक्षित श्रेणी का लाभ नहीं दिया गया।
दस्तावेज सत्यापन के दौरान उठा विवाद
बिहार नर्सिंग कैडर नियमावली, 2024 के तहत बिहार के बाहर से जीएनएम करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भारतीय नर्सिंग परिषद का उपयुक्तता प्रमाण-पत्र अनिवार्य किए जाने का मुद्दा भी भर्ती प्रक्रिया के दौरान उठा था। इस शर्त को चुनौती दिए जाने के बाद हाईकोर्ट ने 16 मई 2025 को अंतरिम आदेश जारी कर संबंधित प्रमाण-पत्र और बिहार नर्सिंग काउंसिल में पंजीकरण के बिना आवेदन करने की अनुमति दी थी।
लिखित परीक्षा में सफल होने के बाद दस्तावेज सत्यापन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के आरक्षण प्रमाण-पत्रों को लेकर आपत्ति की गई। आयोग ने 23 मई 2025 के बाद जारी प्रमाण-पत्रों को अमान्य मानते हुए संबंधित अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में रखा था। इसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
स्वास्थ्य विभाग के पत्र का भी लिया संज्ञान
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्वास्थ्य विभाग की मुख्य निदेशक (नर्सिंग) के 21 मई 2026 के पत्र का भी संज्ञान लिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस पत्र में 13 जून 2025 तक अपलोड किए गए प्रमाण-पत्रों को स्वीकार करने की बात कही गई थी।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद BTSC को संबंधित अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों पर आदेश के अनुरूप विचार करते हुए उनकी आरक्षित श्रेणी के आधार पर परिणाम प्रकाशित करना होगा।
अभ्यर्थियों को मिल सकती है राहत
पटना हाईकोर्ट के इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें आरक्षण प्रमाण-पत्रों की वैधता को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ा था। हालांकि, संबंधित अभ्यर्थियों को वास्तविक लाभ आयोग की ओर से अदालत के आदेश के अनुपालन और परिणाम जारी किए जाने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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