बिहार में PhD की डिग्री के लिए थीसिस अपलोड करना अनिवार्य, 8 विश्वविद्यालयों को लंबित काम पूरा करने का निर्देश

पटना: बिहार में पीएचडी करने वाले शोधार्थियों के लिए अहम खबर है। अब शोध गंगा पोर्टल पर पीएचडी थीसिस की सॉफ्ट कॉपी अपलोड करने की प्रक्रिया को लेकर राज्यपाल सचिवालय ने सख्ती दिखाई है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति सचिवालय ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को निर्देश दिया है कि शोध प्रबंध अपलोड करने की प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाए। साथ ही, अब तक अपलोड की गई थीसिस और लंबित कार्यों की रिपोर्ट भी मांगी गई है।

Oct 12, 2026 - 16:24
बिहार में PhD की डिग्री के लिए थीसिस अपलोड करना अनिवार्य, 8 विश्वविद्यालयों को लंबित काम पूरा करने का निर्देश

पटना: बिहार में पीएचडी करने वाले शोधार्थियों के लिए अहम खबर है। अब शोध गंगा पोर्टल पर पीएचडी थीसिस की सॉफ्ट कॉपी अपलोड करने की प्रक्रिया को लेकर राज्यपाल सचिवालय ने सख्ती दिखाई है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति सचिवालय ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को निर्देश दिया है कि शोध प्रबंध अपलोड करने की प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाए। साथ ही, अब तक अपलोड की गई थीसिस और लंबित कार्यों की रिपोर्ट भी मांगी गई है।

मौखिक परीक्षा के एक सप्ताह के भीतर अपलोड करनी होगी थीसिस

निर्देश के मुताबिक, पीएचडी की मौखिक परीक्षा पूरी होने के एक सप्ताह के भीतर संबंधित शोधार्थी का शोध प्रबंध शोध गंगा पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शोध कार्य समय पर राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी में उपलब्ध हो सके।

इस व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालयों को शोधार्थियों की थीसिस अपलोड करने में अनावश्यक देरी से बचने और लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने को कहा गया है।

20,152 थीसिस अपलोड, करीब 50 हजार का काम बाकी

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बिहार के विश्वविद्यालयों में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर चुके 20,152 शोधार्थियों की थीसिस शोध गंगा पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है। वहीं, करीब 50 हजार थीसिस अपलोड करने का काम लंबित बताया गया है।

लंबित कार्यों की बड़ी संख्या को देखते हुए राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालयों से प्रगति रिपोर्ट मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन संस्थानों में प्रक्रिया धीमी है और किन कारणों से थीसिस अपलोड करने में देरी हो रही है।

इन विश्वविद्यालयों को जल्द काम पूरा करने का निर्देश

थीसिस अपलोड करने के लंबित कार्य को पूरा करने के लिए कई विश्वविद्यालयों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • मगध विश्वविद्यालय

  • वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय

  • जयप्रकाश विश्वविद्यालय

  • बीएन मंडल विश्वविद्यालय

  • कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय

  • मुंगेर विश्वविद्यालय

  • पूर्णिया विश्वविद्यालय

  • तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय

इन विश्वविद्यालयों को लंबित थीसिस अपलोड करने की प्रक्रिया तेज करने और निर्धारित निर्देशों के अनुरूप रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है।

क्या है शोध गंगा पोर्टल?

शोध गंगा एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी है, जहां भारतीय विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों के पीएचडी शोध प्रबंधों को डिजिटल रूप में संग्रहित किया जाता है। इसके माध्यम से शिक्षक, विद्यार्थी और शोधकर्ता विभिन्न विषयों पर उपलब्ध शोध कार्यों तक पहुंच सकते हैं।

इस व्यवस्था से शोध कार्यों की उपलब्धता बढ़ती है और शोधार्थियों को पहले से प्रकाशित शोध सामग्री का अध्ययन करने में मदद मिलती है। इससे अकादमिक पारदर्शिता और शोध की गुणवत्ता को भी बढ़ावा मिलता है।

शोधार्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्देश?

थीसिस अपलोड करने की प्रक्रिया समय पर पूरी होने से शोध कार्यों का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और विश्वविद्यालयों में शोध संबंधी औपचारिकताओं को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, किसी शोधार्थी को पीएचडी की डिग्री जारी करने की अंतिम प्रक्रिया संबंधित यूजीसी नियमों और विश्वविद्यालय के लागू प्रावधानों के अनुसार ही होगी।

बिहार में राज्यपाल सचिवालय की इस पहल के बाद अब विश्वविद्यालयों पर लंबित थीसिस अपलोड करने और रिपोर्ट सौंपने का दबाव बढ़ेगा। शोधार्थियों को सलाह है कि वे अपनी थीसिस अपलोड करने की स्थिति की जानकारी संबंधित विश्वविद्यालय के शोध विभाग से प्राप्त करें।

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