सरायकेला में अवैध बालू ढुलाई का कहर! झिमड़ी गांव के पास तेज रफ्तार हाइवा पलटा, ग्रामीणों में दहशत
सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के तिरुलडीह थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन और ढुलाई को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि रात के अंधेरे में बालू लदे भारी वाहन तेज रफ्तार से गांव की सड़कों पर दौड़ते हैं, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। इसी बीच रविवार रात बालू लदा एक हाइवा झिमड़ी गांव के पास अनियंत्रित होकर पलट गया। गनीमत रही कि इस घटना में किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं है।
सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के तिरुलडीह थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन और ढुलाई को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि रात के अंधेरे में बालू लदे भारी वाहन तेज रफ्तार से गांव की सड़कों पर दौड़ते हैं, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। इसी बीच रविवार रात बालू लदा एक हाइवा झिमड़ी गांव के पास अनियंत्रित होकर पलट गया। गनीमत रही कि इस घटना में किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं है।
झिमड़ी गांव के पास पलटा बालू लदा हाइवा
मिली जानकारी के अनुसार, रविवार रात तिरुलडीह की ओर से बालू लोड कर एक हाइवा नीमडीह की तरफ जा रहा था। इसी दौरान झिमड़ी गांव के पास चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और हाइवा सड़क पर पलट गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि हाइवा किसी घर में घुस जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था और कई लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी। ग्रामीणों ने राहत जताई कि वाहन किसी घर से नहीं टकराया।
कार्रवाई के बाद भी बालू ढुलाई जारी रहने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, कुछ दिन पहले तिरुलडीह के नए थाना प्रभारी ने बालू ढोने वाले वाहनों के चालान और ओवरलोडिंग की जांच की थी। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद भी रात के समय बालू की ढुलाई पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी है। उनका दावा है कि भारी वाहन अब भी तेज रफ्तार से गांवों की सड़कों से गुजर रहे हैं।
अवैध खनन और बालू की ढुलाई को लेकर लगाए गए इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि तथा संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
ग्रामीणों को सता रहा हादसे का डर
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात में भारी वाहनों की आवाजाही के कारण वे अपने घरों में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, दिनभर मेहनत करने के बाद रात में परिवार के साथ आराम करना मुश्किल हो गया है। उन्हें डर रहता है कि कहीं कोई तेज रफ्तार वाहन अनियंत्रित होकर घर में न घुस जाए।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि गांव की सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही से बच्चों, बुजुर्गों और रोजाना काम पर जाने वाले मजदूरों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने जिला खनन विभाग, उपायुक्त और स्थानीय प्रशासन से मामले की जांच कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि बालू के खनन और परिवहन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए, ओवरलोडिंग पर रोक लगाई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
ग्रामीणों ने रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण लगाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब सवाल यह है कि झिमड़ी गांव के पास हाइवा पलटने की घटना के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बालू ढुलाई पर क्या कार्रवाई की जाती है।
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