ट्रेजरी घोटाले को लेकर BJP का हेमंत सरकार पर हमला, कहा : चहेते अफसरों को बचाने के लिए जांच में लीपापोती
RANCHI : भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में हुए हजारों करोड़ के ट्रेजरी घोटाले में बड़ा आरोप लगाया है. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सरकार पर अपने चहेते वरीय अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया है. पार्टी प्रवक्ता ने कहा है कि खुद राज्य के वित्त मंत्री स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले कुछ वर्षों के लगभग 10,000 करोड़ रुपये के सरकारी धन का हिसाब नहीं मिल रहा है. भाजपा शुरू से ही आशंका व्यक्त करती रही है कि सरकार अपने चहेते अफसरों को बचाने में लगी है.
एसआईटी के गठन में भी उन अफसरों को रखा गया था जिनके एसपी के कार्यकाल में खुद ट्रेजरी घोटाला हुआ था. जांच कर रही एसआईटी के दो सदस्य हजारीबाग और बोकारो में एसपी भी रह चुके हैं जहां घोटाले की चार्जशीट जमा हो चुकी है. उनसे निष्पक्ष जांच की अपेक्षा नहीं हो सकती.
सरकार ने सिर्फ छोटी मछलियों को पकड़ कर बड़े अफसर को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने का काम किया है. बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सीबीआई कोर्ट ने चारा घोटाले के मुकदमों में ट्रेजरी अफसरों की भी भूमिका स्वीकार करते हुए हुए सजा दिया था जिसे बाद में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक ने सही ठहराया था.
घोटाले की लीपापोती के लिए होती है सीआईडी जांच
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड वित्त नियमावली के सेक्शन 114, 115 , 116, 305, 305 A और 306 और झारखंड कोषागार संहिता-2016 के अपेंडिक्स 3, अपेंडिक्स 18 और अपेंडिक्स 19 में सरकारी धन की निकासी होने का उल्लेख करते हुए कहा कि इसको लेकर डीडीओ और ट्रेज़री अफसरों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय है. संबंधित डीडीओ और ट्रेज़री अफसरों का दायित्व है कि वे बिल, दस्तावेज और हस्ताक्षरों की वैधता की जांच करें.किसी भी प्रकार का संदेह होने पर जांच करना आवश्यक है. सरकारी धन के भुगतान में अधिकारियों से पूरी सावधानी बरतने की अपेक्षा की गई है.
उन्होंने कहा कि जब सीआईडी ने चार्जशीट की तो उसमें सभी डीडीओ और ट्रेज़री अफसरों को क्लीनचिट देते हुए उनका नाम भी शामिल नहीं किया. चाईबासा कोषागार के ट्रेज़री घोटाले में भी सीआईडी ने सिर्फ सिपाहियों का नाम दिया है. झारखंड में घोटाले की लीपा पोती होने के लिए जिस जांच को ठंडा बस्ते में डालना होता है उसे सीआईडी को जिम्मा दे दिया जाता है.
राज्य सरकार ने स्पेशल ऑडिट की अनुशंसा प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल को की थी. इसके आलोक में प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल ने 11 मई, 2026 को गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर 87 प्रकार के दस्तावेज मांगे थे. राज्य सरकार ने 2 महीने से भी ज्यादा बीत जाने के बाद ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं.
इसी तरीके से उत्पाद सचिव के नेतृत्व में बनी हुई एसआईटी ने भी अभी तक कोई जांच रिपोर्ट नहीं दी है. पूरे मामले को राज्य सरकार रफा दफा करने में लगी हुई है.राज्य सरकार भूल जाती है किसी तरीके से चारा घोटाले को रफा दफा करने के आरोप में लालू प्रसाद को 6 मुकदमों में सजा हो गई थी.
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0











