जमुई के नक्सल प्रभावित गुरमाहा गांव में शिक्षा की नई सुबह, पहली बार दो बेटियों ने पास की मैट्रिक परीक्षा
जमुई जिले के अतिनक्सल प्रभावित गुरमाहा गांव में अब कभी गोलियों की गूंज के बजाय शिक्षा की आवाज सुनाई दे रही है। जिस गांव में कभी डर और नक्सली गतिविधियों के कारण लोगों का आना-जाना मुश्किल माना जाता था, उसी गांव की दो बेटियों ने मैट्रिक परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया है।
जमुई जिले के अतिनक्सल प्रभावित गुरमाहा गांव में अब कभी गोलियों की गूंज के बजाय शिक्षा की आवाज सुनाई दे रही है। जिस गांव में कभी डर और नक्सली गतिविधियों के कारण लोगों का आना-जाना मुश्किल माना जाता था, उसी गांव की दो बेटियों ने मैट्रिक परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया है।
बताया जा रहा है कि आजादी के बाद पहली बार गुरमाहा गांव की दो बेटियों सोनिया कुमारी और सपना कुमारी ने मैट्रिक की परीक्षा पास की है। दोनों की सफलता से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यह उपलब्धि सिर्फ दोनों छात्राओं की नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, गुरमाहा और आसपास के इलाके में कभी नक्सली गतिविधियां चरम पर थीं। इसके कारण शिक्षा और विकास की रफ्तार प्रभावित रही। बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचना भी आसान नहीं था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सड़क, स्कूल और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ इलाके में बदलाव देखने को मिला है।
सोनिया और सपना की सफलता को ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं। दोनों बेटियों ने गांव के दूसरे बच्चों और खासकर बेटियों के सामने एक मिसाल पेश की है। ग्रामीणों ने दोनों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि अब गांव के अधिक बच्चे पढ़ाई की ओर आगे बढ़ेंगे।
खास बात यह है कि दोनों छात्राओं का सपना आगे चलकर बिहार पुलिस की वर्दी पहनना है। सोनिया और सपना पुलिस सेवा में जाकर अपने गांव और परिवार का नाम रोशन करना चाहती हैं। अब दोनों के इस सपने को पूरा करने की दिशा में परिवार और संसाधनों का सहयोग कितना मिलता है, यह आने वाला समय बताएगा।
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