बेटी ने प्रेम विवाह किया तो पिता ने उठाई उसकी ‘अर्थी’, पुतला बनाकर निकाली शवयात्रा और किया दाह संस्कार
पूर्णिया। एक तरफ बेटी की विदाई के वक्त पिता की आंखों में खुशी और भावुकता के आंसू होते हैं, लेकिन पूर्णिया के केनगर प्रखंड में एक पिता ने अपनी बेटी की ऐसी ‘विदाई’ की, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। बेटी के प्रेम विवाह से नाराज पिता ने उसका पुतला तैयार कराया, उसे अर्थी पर रखा, गांव में अंतिम यात्रा की तरह घुमाया और बाद में पुतले का दाह संस्कार कर दिया।
पूर्णिया:- एक तरफ बेटी की विदाई के वक्त पिता की आंखों में खुशी और भावुकता के आंसू होते हैं, लेकिन पूर्णिया के केनगर प्रखंड में एक पिता ने अपनी बेटी की ऐसी ‘विदाई’ की, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। बेटी के प्रेम विवाह से नाराज पिता ने उसका पुतला तैयार कराया, उसे अर्थी पर रखा, गांव में अंतिम यात्रा की तरह घुमाया और बाद में पुतले का दाह संस्कार कर दिया।
मामला केनगर प्रखंड की गंगेली पंचायत के चपय गांव का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, गांव निवासी मनोज गोस्वामी की बेटी रिया कुमारी का गांव के ही मिलन पासवान के साथ प्रेम संबंध था। दोनों ने परिवार की इच्छा के खिलाफ शादी कर ली। बताया जा रहा है कि यह अंतरजातीय विवाह था, जिसके कारण लड़की का परिवार इस रिश्ते से नाराज था।
घर से जाने के बाद दिल्ली से बरामद हुई थी युवती
बताया गया कि रिया कुमारी 8 सितंबर को युवक के साथ घर से चली गई थी। इसके बाद उसके पिता की ओर से थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए युवती को दिल्ली से बरामद किया। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।
अदालत में युवती ने अपनी इच्छा से युवक के साथ रहने की बात कही। इसके बाद परिवार की नाराजगी और बढ़ गई। परिवार की ओर से बेटी के इस फैसले को स्वीकार नहीं किया गया।
पुतला बनाकर निकाली गई अंतिम यात्रा
इसके बाद पिता ने बेटी से संबंध खत्म करने का फैसला सार्वजनिक तौर पर जताया। परिजनों और ग्रामीणों की मौजूदगी में रिया का पुतला तैयार किया गया। पुतले को बाकायदा अर्थी पर रखा गया और अंतिम यात्रा की तर्ज पर गांव में घुमाया गया। इसके बाद पुतले का दाह संस्कार कर दिया गया।
घटना के दौरान ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही। इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।
‘सामाजिक प्रतिष्ठा को पहुंची ठेस’
रिया के पिता मनोज गोस्वामी का कहना है कि बेटी के इस फैसले से परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। वहीं, स्थानीय लोगों के बीच भी इस घटना को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
यह घटना परिवार की पसंद और युवाओं के अपने जीवनसाथी चुनने के अधिकार के बीच मौजूद सामाजिक टकराव को सामने लाती है। एक बेटी के जिंदा रहते उसके पुतले की अंतिम यात्रा और दाह संस्कार किए जाने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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