कैंप से कैडेटों को अपनी छिपी प्रतिभा पहचानने का मिलता है अवसर, देश सेवा के लिए ईमानदारी और जिम्मेदारी जरूरी- डॉ. सतीश सिंह चंद्र
गयाजी। गया कॉलेज परिसर में 6 बिहार बटालियन एनसीसी की ओर से आयोजित 17वें कंबाइंड एनुअल ट्रेनिंग कैंप के पांचवें दिन सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें गया कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सतीश सिंह चंद्र ने एनसीसी कैडेटों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण शिविर कैडेटों के लिए सीखने और अपनी प्रतिभा को पहचानने का बेहतर अवसर है। कैंप के दौरान प्रत्येक कैडेट को यह जानने का मौका मिलता है कि उसके अंदर कौन-सी प्रतिभा छिपी हुई है। उन्होंने कहा कि जीवन में हर परिस्थिति से कुछ न कुछ सीखने का प्रयास करना चाहिए। देश सेवा के लिए किसी विशेष स्थान पर होना जरूरी नहीं है। व्यक्ति जहां है, वहीं से ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ देश की सेवा कर सकता है। उन्होंने कैडेटों से कहा कि वे जीवन में जो भी कार्य करें, उसे पूरी ईमानदारी, अनुशासन और निष्ठा के साथ करें। यही गुण उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक और बेहतर इंसान बनाने में मदद करेंगे। प्राचार्य ने कैडेटों को प्रेरित करने के लिए जंगल में लगी आग की एक कहानी भी सुनाई। उन्होंने बताया कि जंगल में आग लगने पर एक छोटी-सी चिड़िया अपनी चोंच में पानी भरकर आग बुझाने का प्रयास कर रही थी। भले ही उसके प्रयास छोटे थे, लेकिन उसने अपनी क्षमता के अनुसार जिम्मेदारी निभाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इससे सीख मिलती है कि किसी भी बड़े कार्य में हर व्यक्ति का छोटा-सा योगदान भी महत्वपूर्ण होता है। कार्यक्रम के अंत में 6 बिहार बटालियन एनसीसी के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल पंकज कुमार, कीर्ति चक्र ने गया कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सतीश सिंह चंद्र को स्मृति चिह्न (मोमेंटो) देकर सम्मानित किया। कैंप में शामिल कैडेटों ने सेमिनार के दौरान दिए गए संदेशों को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
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