JSSC-CGL और CDPO नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, सरकार से जवाब तलब
RANCHI : झारखण्ड सरकार की ओर से 18 अगस्त की देर रात जारी नोटिफिकेशन के बाद नौकरी गंवा चुके सीडीपीओ और जेएसएससी-सीजीएल कर्मियों को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. जस्टिस दीपक रौशन की कोर्ट ने नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगाते हुए संबंधित कर्मियों और पदाधिकारियों के लिए सेवा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है.
जस्टिस दीपक रौशन की कोर्ट ने सुभाष मुर्मू एवं अन्य (WP/10691/2026), आशीष अक्षत एवं अन्य (WP/10692/2026), रवि कुमार हांसदा एवं अन्य (WP/10693/2026) और आकांक्षा मिंज एवं अन्य (WP/10694/2026) की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है. बता दें कि सरकार के फैसले से सीजीएल परीक्षा से चयनित करीब 2000 कर्मचारी और सीडीपीओ पद के लिए चयनित 64 पदाधिकारी सड़क पर आ गए थे.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
याचिकाकर्ता की अधिवक्ता प्रेरणा झुनझुनवाला ने कहा है कि सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक रौशन की पीठ ने राज्य सरकार से 7 सितंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है. इसपर प्रार्थी को 14 सितंबर तक पक्ष रखना है. मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी.
उन्होंने कहा कि सीजीएल मामले में हस्तक्षेप याचिका आई है. इसपर भी अब 15 सिंतबर को ही सुनवाई होगी. कोर्ट ने रेगुलर बेसिस पर सुनवाई करने को कहा है. कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि सीआईडी की जांच में ऐसा क्या मिला है कि इतना बड़ा फैसला लिया गया. इससे पहले 20 अगस्त को हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी और एफएसओ पदाधिकारियों की नियुक्ति पर राज्य सरकार के रोक के फैसले पर स्टे लगाया था.
हाईकोर्ट का फैसला आते ही जश्न का माहौल
इधर, हाईकोर्ट का फैसला आते ही प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे सीजीएल परीक्षा से चयनित कर्मचारी झूम उठे. भावनाएं छलक पड़ी. सीजीएल कर्मियों ने इस मौके पर राष्ट्रगान गाकर अपनी एकजुटता दिखाई. कर्मियों ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक मेहनत और त्याग के बाद इस नौकरी को हासिल किया था. लेकिन भीड़ तंत्र के आगे सरकार झुक गई और उनकी नियुक्ति को रद्द कर दिया. लेकिन उन्हें कोर्ट से न्याय का भरोसा था. कर्मचारियों ने कहा कि सरकार को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए.
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