जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम सील, रांची में धारा 163 लागू, भारी पुलिस बल तैनात
RANCHI : झारखण्ड की राजधानी रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम एक बार फिर सुर्खियों में है. सुर्खियों में रहने की वजह है कि बीते 26 दिनों तक चले छात्र आंदोलन का गवाह रहा यह मैदान अब पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है. आंदोलन समाप्त होने और छात्रों की 'आभार यात्रा' के बाद प्रशासन ने स्टेडियम के मुख्य दरवाजे पर ताला जड़ दिया है. इसके साथ ही परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के दृष्टिकोण से धारा 163 (निषेधाज्ञा) लागू कर दी गई है.
स्टेडियम के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल और बैरिकेड्स तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी स्थान पर भीड़ इकट्ठा न हो सके. तालाबंदी का असर इतना व्यापक है कि पूर्व निर्धारित गणेश पूजा के लिए पहुंचे समिति के सदस्यों को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली, जिसके कारण उन्हें गेट के बाहर ही भूमि पूजन का कार्यक्रम संपन्न करना पड़ा.
हाईकोर्ट के स्टे के बाद फिर भड़का छात्रों का आक्रोश
स्टेडियम में इस कड़ी सुरक्षा और तालाबंदी की वजह 11वीं-13वीं JPSC परीक्षा और फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर परीक्षा को लेकर आया हाईकोर्ट का नया आदेश है. हाईकोर्ट द्वारा इन परीक्षाओं के रद्द होने पर स्टे (रोक) लगाए जाने के बाद से अभ्यर्थियों और छात्रों में एक बार फिर भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है.
उग्र हुए छात्रों ने राज्य सरकार के खिलाफ दोबारा मोर्चा खोलने का ऐलान कर दिया है. इसी के विरोध में आज छात्र राज्य के सभी 24 जिलों के साथ-साथ रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने जा रहे हैं.
नए आंदोलन की आहट, कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
जिस स्टेडियम ने एक साथ 22 परीक्षाएं रद्द कराने वाले देशव्यापी आंदोलन को दिशा दी थी, वहां अब किसी भी तरह के जमावड़े पर पूरी तरह रोक है. पीसीआर वैन और पुलिस गश्ती दल लगातार इलाके पर नजर बनाए हुए हैं. दूसरी ओर, CGL (सीजीएल) परीक्षा को लेकर दायर रिट पिटीशन पर भी अभ्यर्थियों की निगाहें कोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी हुई हैं. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के सील होने के बाद अब यह साफ हो गया है कि यदि छात्र दोबारा कोई बड़ा आंदोलन शुरू करते हैं, तो उन्हें इसके लिए किसी नए स्थान का चयन करना होगा.
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