'अक्का तेरी अमर कहानी' कविता संग्रह का लोकार्पण संपन्न 

अक्का का शिव के प्रति समर्पण भक्ति का अतुलनीय उदाहरण है -डॉ  सुबोध सिंह शिवगीत

Sep 16, 2026 - 17:27
'अक्का तेरी अमर कहानी' कविता संग्रह का लोकार्पण संपन्न 

  हजारीबाग के स्थानीय स्वर्ण जयंती पार्क में सागर भक्ति संगम के तत्वाधान में आयोजित एक समारोह में कवि गोपी कृष्णा पांडेय का सद्य प्रकाशित 'अक्का तेरी अमर कहानी' कविता संग्रह का लोकार्पण विनोबा भावे विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग  के विभागाध्यक्ष डॉ सुबोध सिंह शिवगीत के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद के. सी. मेहरोत्रा एवं संचालन विजय केसरी ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश और गुरु वंदना से प्रारंभ हुआ।
   इस अवसर पर डॉ. सुबोध सिंह शिवगीत ने कहा कि अक्का  की कथा आठ सौ  वर्ष पूर्व की है। शिव के प्रति उनका समर्पण भक्ति का एक अतुलनीय उदाहरण है। जिस तरह मीरा की भक्ति कृष्ण के प्रति थी, ठीक उसी रूप में अक्का की शिव के  प्रति  भक्ति  थी। कवि गोपी कृष्ण पांडेय का 'अक्का की अमर कहानी' कविता संग्रह एक भी शिव भक्ति से ओत-प्रोत होकर लिखी गई है। कविता की शैली ऐसी है कि पाठकों को  शिवभक्ति की अविचल धारा से साक्षात्कार करा जाती है। आज नारी सम्मान की बातें जरूर की जाती है, लेकिन देशवासियों को यह जानना चाहिए कि इस भारत भूमि में प्रारंभ से ही नारियों की पूजा होती रही है। 
 अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद के. सी. मेहरोत्रा ने कहा कि अक्का तेरी अमर कहानी कविता संग्रह  शिवभक्ति से सराबोर एक  बेशकीमती पुस्तक है।  इस पुस्तक की रचना कवि गोपी कृष्णा पांडेय ने अक्का की शिव भक्ति से प्रेरणा लेकर लिखी है।  इस कविता संग्रह को जितनी बार पढ़ा जाएगा अक्का की शिवभक्ति और शिव के प्रति उनका समर्पण एक नए रूप में मन मस्तिष्क में अवतरित होता जाएगा।
   स्तंभकार विजय केसरी ने कहा कि अक्का तेरी अमर कहानी कविता संग्रह शीर्षक से ही प्रतीत होता है कि अक्का की यह जीवंत कहानी सदैव के लिए एक कालजई  कथा के रूप में दर्ज हो गई है । शिव की भक्ति से  जुड़े कई उदाहरण हैं,लेकिन अक्का की शिवभक्ति अपने आप में एक दुर्लभ और अकेला उदाहरण है । जिस कालखंड में अक्का राजमहल छोड़कर शिवभक्ति में पूरी तरह नग्न होकर निकल पड़ थी,जहां देह गौण  हो जाता है और देह  के अंदर विद्यमान आत्मा अपने  आराध्य शिव से मिलने के लिए सब कुछ त्याग देती  है । अक्का अपनी शिव भक्ति से वैराग्य को उत्पन्न कर शिव मिलन का मार्ग प्रशस्त करती हैं। अक्का तेरी अगर कहानी देह  से मुक्ति और आत्मा से ईश्वर का मिलन पर आधारित भक्ति की एक अनुपम कृति है।
 कवि गोपी कृष्णा पांडेय ने कहा कि अक्का की शिव भक्ति की कथा  पहली बार पढ़ी तो मन मस्तिष्क में शिव भक्ति की अविचल धारा  बहने लगी। मेरे  मन मस्तिष्क में दिन -  रात केवल अक्का की शिवभक्ति ही नजर आने लगी। मैं भी अक्का की ही तरह शिव मिलन के लिए आतुर हो उठा। इसी शिव भक्ति की आतुरता के गर्भ से कुछ पंक्तियां प्रस्फुटित होने लगीं और अक्का तेरी अमर कहानी कविता संग्रह में पिरोती  गईं। सच पूछा जाए तो इस संग्रह में मैंने अपने ज्ञान व विवेक से कुछ नहीं लिखा  बल्कि शिवा भक्ति की अंत: प्रेरणा से ही पंक्तियां खुद व खुद दर्ज होती चली गईं। यह अब तक के मेरे जीवन का न भूलने वाला एक संस्मरण बन गया। 
 आयोजित कार्यक्रम में शंभू शरण सिन्हा, सुरेश होर्रा, सतीश होर्रा, बृ
ब्रजनंदन प्रसाद, योगेंद्र प्रसाद, अखिलेश्वर सिंह, सुधीर गुप्ता, इंद्र सोनी, महेंद्र राम, धर्मनाथ तिवारी, मनोज गुप्ता, सुरेश मिस्त्री, अजीत गुप्ता, उषा सहाय, नीलम होर्रा, तृप्ता गुप्ता, डॉ बीना अखौरी, कन्हाई राम, मिथुन राणा सहित नगर कई गण मान्य  लोग सम्मिलित हुए।  धन्यवाद ज्ञापन सुरेश होर्रा ने किया।

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