'गया जी गीतिका' आस्था, श्रद्धा और ऐतिहासिक विरासत की सरल कुंजी है: डॉ ममता मेहरा
संस्कृत विभाग में पितृपक्ष विशेषांक पर परिचर्चा आयोजित
बोधगया। मगध विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग में 'पितृपक्ष मेला विशेषांक गया जी गीतिका' के सप्तम अंक पर एक गरिमामयी परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्वानों एवं शोधार्थियों ने मोक्षधाम गया जी के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्वरूप पर गहन विचार-विमर्श किया। संस्कृत विभाग की वरीय सहायक अचार्य सह संपादक डॉ. ममता मेहरा ने विशेषांक के साहित्यिक व आध्यात्मिक पक्षों को रेखांकित करते हुए कहा कि पितृपक्ष मेला विशेषांक के रूप में 'गया जी गीतिका' का सप्तम अंक आस्था, श्रद्धा, विश्वास और पितरों के प्रति हमारे स्मरण एवं कृतज्ञता का भावपूर्ण समर्पण है। यह पत्रिका प्रतिष्ठित विद्वानों और शोध-साधकों द्वारा मोक्ष भूमि गया जी पर लिखे गए गंभीर आलेखों का संकलन है, जिसे 'सत्यम्, शिवम् और सुन्दरम्' की उदात्त संकल्पना के साथ संयोजित किया गया है। गया जी की ऐतिहासिक विरासत को समझने तथा पिंडदान व श्राद्ध कर्म के सूक्ष्म महत्व को आत्मसात करने के लिए यह विशेषांक पाठकों हेतु एक सरल कुंजी के समान है। संस्कृत विभाग की वरीय सहायक आचार्य डॉ. एकता वर्मा ने विशेषांक के विषय-वस्तु पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह विशेषांक पितृपक्ष मेले की समसामयिक प्रासंगिकता, श्राद्ध कर्म, पिंडदान और गया जी के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के प्रत्येक पहलू को समेटे हुए एक अमूल्य दस्तावेज़ है। वहीं, श्रम, रोजगार एवं कल्याण विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. वंदना कुमारी ने पत्रिका के प्रधान संपादक, संपादक, प्रकाशक एवं सभी योगदानकर्ता रचनाकारों को बधाई व शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह विशेषांक गया के प्रबुद्ध लेखकों और साहित्यकारों के गहन चिंतन एवं ज्ञान का एक उत्कृष्ट निचोड़ है। आने वाले समय में मोक्षस्थली गया जी पर शोध करने वाले शोधार्थियों के लिए यह एक प्रामाणिक एवं अत्यंत लाभकारी संदर्भ साधन सिद्ध होगा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0





