मोबाइल के दौर में किताबों का संदेश दे रहा जमशेदपुर का दुर्गा पूजा पंडाल, कॉपी-पेंसिल से की गई अनोखी सजावट

जमशेदपुर: आज के डिजिटल दौर में जहां बच्चे मोबाइल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन मनोरंजन की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, वहीं जमशेदपुर के गोविंदपुर में बना दुर्गा पूजा पंडाल किताबों की अहमियत का संदेश दे रहा है। कॉपी, पेंसिल, कलम और किताबों की प्रतिकृतियों से सजा यह अनोखा पंडाल श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

Oct 18, 2026 - 13:45
मोबाइल के दौर में किताबों का संदेश दे रहा जमशेदपुर का दुर्गा पूजा पंडाल, कॉपी-पेंसिल से की गई अनोखी सजावट

जमशेदपुर: आज के डिजिटल दौर में जहां बच्चे मोबाइल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन मनोरंजन की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, वहीं जमशेदपुर के गोविंदपुर में बना दुर्गा पूजा पंडाल किताबों की अहमियत का संदेश दे रहा है। कॉपी, पेंसिल, कलम और किताबों की प्रतिकृतियों से सजा यह अनोखा पंडाल श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

किताबों की दुनिया में दिख रही पढ़ाई की झलक

जमशेदपुर में इस साल दुर्गा पूजा के अवसर पर अलग-अलग थीम पर आकर्षक पंडाल तैयार किए गए हैं। कहीं भव्य मंदिरों की झलक देखने को मिल रही है, तो कहीं कलाकृतियों के माध्यम से सामाजिक संदेश दिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गोविंदपुर का दुर्गा पूजा पंडाल अपनी अनूठी थीम के कारण खास पहचान बना रहा है।

इस पंडाल में बड़ी-बड़ी किताबों की प्रतिकृतियों के साथ कॉपी, पेंसिल और कलम जैसी पढ़ाई से जुड़ी वस्तुओं को खूबसूरती से सजाया गया है। पंडाल की बनावट बच्चों और बड़ों, दोनों को आकर्षित कर रही है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को किताबों की एक अलग दुनिया का अनुभव हो रहा है।

मोबाइल के दौर में किताबों से जुड़ने का संदेश

आज बच्चों के बीच मोबाइल फोन और डिजिटल मनोरंजन का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में किताबों के प्रति रुचि बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पूजा कमेटी ने इस बार किताबों की दुनिया को पंडाल की थीम बनाया है।

इस पहल के जरिए लोगों को पढ़ने की आदत विकसित करने और किताबों के महत्व को समझने का संदेश दिया जा रहा है। पंडाल बच्चों के लिए केवल आकर्षण का केंद्र नहीं, बल्कि पढ़ाई और ज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने का एक माध्यम भी बन रहा है।

15 से अधिक कारीगरों ने एक महीने तक की मेहनत

इस अनोखे पंडाल को तैयार करने में कारीगरों ने काफी मेहनत की है। जानकारी के मुताबिक, 15 से अधिक कारीगरों ने करीब एक महीने तक दिन-रात काम करके किताबों, कॉपी और पेंसिल की विशाल प्रतिकृतियां तैयार कीं। सजावट से लेकर हर छोटी-बड़ी आकृति को इस तरह बनाया गया है कि पूरी संरचना किताबों की दुनिया जैसी दिखाई देती है।

पंडाल की विशेष थीम ने दुर्गा पूजा के उत्सव को एक रचनात्मक संदेश से जोड़ दिया है। जहां श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंच रहे हैं, वहीं उन्हें शिक्षा और किताबों के महत्व को समझने का अवसर भी मिल रहा है।

गोविंदपुर का यह पंडाल दिखाता है कि दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक आयोजन के माध्यम से भी समाज को शिक्षा, ज्ञान और पढ़ने की संस्कृति का संदेश दिया जा सकता है।

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